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नई दिल्ली/उलानबटार, 04 जून । मंगोलिया की राजधानी उलानबटार स्थित गंदंतेगचेनलिंग मठ में भगवान बुद्ध के दो सबसे प्रमुख शिष्यों अर्हत सारिपुत्र और अर्हत महामौद्गल्यायन के पवित्र अवशेषों (पवित्र अस्थि-अवशेषों) को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए श्रद्धालु एकत्रित हुए।

संस्कृति मंत्रालय के अनुसार आज सुबह से ही स्थानीय बौद्ध अनुयायी और श्रद्धालु इन पावन अवशेषों के दर्शन तथा अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए यहां एकत्रित हुए। पूरे मठ परिसर में आध्यात्मिक शांति और भक्ति का माहौल बना हुआ है। इन दोनों महान अरहंतों के ये पवित्र अवशेष 9 जून तक श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए यहां उपलब्ध रहेंगे।

उल्लेखनीय है कि इन अवशेषों को भारत से 31 मई से 10 जून 2026 तक चलने वाली दस दिवसीय प्रदर्शनी के लिए मंगोलिया ले जाया गया है। बुद्ध पूर्णिमा 2026 के अवसर पर भगवान बुद्ध के प्रमुख शिष्यों पवित्र अवशेषों को इस मठ में विधिवत स्थापित किया गया। “प्रकाश के पात्र” प्रदर्शनी का उद्घाटन असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य और मंगोलिया में भारत के राजदूत अतुल मल्हारी गोत्सुर्वे की उपस्थिति में किया गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछले वर्ष अक्टूबर में मंगोलिया के राष्ट्रपति उखनागीन खुरेलसुख की भारत यात्रा के दौरान इस प्रदर्शनी की घोषणा की थी।

भगवान बुद्ध के इन शिष्यों के पवित्र अवशेषों को मंगोलिया लाया जाना दोनों देशों के बीच गहरे ऐतिहासिक तथा सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करता है। बौद्ध परंपरा में अर्हतसारिपुत्र को ‘ज्ञान’ औरअर्हतमहामौद्गल्यायनको ‘अलौकिक शक्तियों’ (ऋद्धियों) का प्रतीक माना जाता है। इसलिए बौद्ध जगत में इन अवशेषों के दर्शन का अत्यंत विशेष महत्व है।

By editor

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