नीरज प्रजापति
राजकीय सम्प्रेक्षण गृह में सिविल जज ने किशोरों से किया सीधा संवाद, समस्याएं सुनीं और कानूनी मदद का भरोसा दिलाया।
मुजफ्फरनगर। राजकीय सम्प्रेक्षण गृह (किशोर) में निरुद्ध किशोरों के अधिकारों और समस्याओं को लेकर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने गंभीरता दिखाई है। बुधवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं सिविल जज (सी०डि०) डॉ. सत्येन्द्र कुमार चौधरी ने राजकीय सम्प्रेक्षण गृह (किशोर), मुजफ्फरनगर का निरीक्षण कर वहां की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने किशोरों से सीधे संवाद करते हुए उनके संवैधानिक एवं विधिक अधिकारों की जानकारी दी और किसी भी कानूनी परेशानी की स्थिति में सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया।
माननीय प्रभारी जनपद न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशन में हुए इस निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य किशोरों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना और उन्हें यह विश्वास दिलाना रहा कि कानून के स्तर पर उनकी समस्याओं को सुना जाएगा। डॉ. सत्येन्द्र कुमार चौधरी ने किशोरों को समझाया कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने विधिक अधिकारों की जानकारी होना जरूरी है। विशेष रूप से संरक्षण की आवश्यकता वाले किशोरों के लिए कानूनी सहायता और अधिकारों की जानकारी उनके भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है।
किशोरों से आमने-सामने सुनी समस्याएं
निरीक्षण के दौरान डॉ. सत्येन्द्र कुमार चौधरी ने सम्प्रेक्षण गृह में निरुद्ध किशोरों से बातचीत की और उनकी व्यक्तिगत तथा कानूनी समस्याओं के बारे में जानकारी ली। उन्होंने किशोरों से उनकी परेशानियों को खुलकर बताने के लिए कहा, ताकि जरूरत के अनुसार संबंधित स्तर पर कार्रवाई की जा सके।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी किशोर को किसी प्रकार की कानूनी समस्या है अथवा उसे अपने अधिकारों से संबंधित कोई जानकारी या सहायता चाहिए तो वह संस्था प्रभारी के माध्यम से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, मुजफ्फरनगर को अवगत करा सकता है। इसके लिए आवेदन पत्र भी दिया जा सकता है। प्राप्त शिकायत अथवा समस्या पर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई किए जाने का भरोसा दिलाया गया।
अधिकारों की जानकारी को बताया जरूरी
डॉ. सत्येन्द्र कुमार चौधरी ने किशोरों को उनके संवैधानिक और विधिक अधिकारों के प्रति जागरूक करते हुए कहा कि कानून की जानकारी व्यक्ति को अपने अधिकारों को समझने और उचित मंच पर अपनी बात रखने में सक्षम बनाती है। उन्होंने किशोरों से कहा कि वे किसी भी समस्या को अपने तक सीमित न रखें और आवश्यकता पड़ने पर उपलब्ध कानूनी सहायता व्यवस्था का उपयोग करें।
निरीक्षण के दौरान किशोरों से संवाद और उनकी समस्याएं सुनने पर विशेष जोर रहा। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से यह संदेश दिया गया कि कानूनी सहायता का उद्देश्य जरूरतमंदों तक न्याय की पहुंच सुनिश्चित करना है। इस दौरान किशोरों को विधिक अधिकारों के साथ-साथ अपनी समस्याओं को उचित माध्यम से सामने रखने के लिए भी प्रेरित किया गया।
