नीरज प्रजापति
मुजफ्फरनगर में छोटे कारोबारियों ने खोला मोर्चा, मरम्मत के नाम पर अतिरिक्त रकम मांगने और विरोध करने पर चालान की धमकी देने के आरोप, विभाग से निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग
मुजफ्फरनगर। बाजारों में कारोबार करना छोटे दुकानदारों के लिए पहले ही किसी चुनौती से कम नहीं है। महंगाई, खर्च और घटते मुनाफे के बीच अब इलेक्ट्रॉनिक कांटों के सत्यापन के नाम पर कथित अतिरिक्त वसूली का मामला सामने आने से व्यापारियों में नाराजगी फैल गई है। आरोप है कि जिन दुकानों के इलेक्ट्रॉनिक कांटे पूरी तरह ठीक हालत में हैं, उनसे भी सत्यापन शुल्क के अलावा जबरन मरम्मत चार्ज वसूला जा रहा है। विरोध करने पर कथित रूप से दुर्व्यवहार और चालान कराने की धमकी दी जाती है। मामले ने अब विभागीय कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। इस प्रकरण को लेकर भारतीय किसान मजदूर संयुक्त मोर्चा ने दुकानदारों की आवाज बुलंद की है। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी शाह आलम के नेतृत्व में प्रभावित दुकानदारों ने विधिक माप विज्ञान विभाग के प्रभारी अधिकारी को लिखित शिकायत सौंपकर पूरे मामले की जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में चार लाइसेंसधारी फर्मों हिन्दुस्तान स्केल वर्क्स, मां शाकुम्भरी एंड कंपनी, प्रदीप स्केल वर्क्स तथा मां लक्ष्मी स्केल कंपनी का उल्लेख किया गया है। दुकानदारों का आरोप है कि इन फर्मों से जुड़े लाइसेंसधारी सत्यापन के दौरान निर्धारित शुल्क के अतिरिक्त मरम्मत के नाम पर भी रकम मांगते हैं। हैरानी की बात यह बताई गई है कि कथित तौर पर बिना किसी तकनीकी खराबी के भी मरम्मत का चार्ज जोड़ दिया जाता है। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि जब छोटे दुकानदार अतिरिक्त रकम देने से इनकार करते हैं तो उनके साथ कथित रूप से गाली-गलौज और अभद्र व्यवहार किया जाता है। इतना ही नहीं, चालान कराने और कारोबार में परेशानी खड़ी करने की धमकी दिए जाने की बात भी शिकायत में कही गई है। हिन्दुस्तान स्केल वर्क्स के लाइसेंसधारी वसीम पर भी विशेष रूप से गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि विरोध करने पर उन्हें कथित तौर पर ऊंचे स्तर तक पहुंच होने की बात कहकर डराया गया। करीमनगर खालापार स्थित दीन मोहम्मद मस्जिद के निकट रहने वाले गुलमोहम्मद, राजा, सोनू और आमिर सहित अन्य दुकानदारों ने इस मामले में शिकायत की है। उनका कहना है कि छोटी दुकानों से परिवारों का पालन-पोषण करने वाले कारोबारियों पर इस तरह अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालना अनुचित है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि सत्यापन और मरम्मत के नाम पर वसूली की जा रही रकम निर्धारित नियमों के अनुरूप है या नहीं? शिकायत के बाद विधिक माप विज्ञान विभाग की जांच और कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। संगठन ने चेतावनी दी है कि दुकानदारों के हितों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
