मनीष अग्रवाल
सहारनपुर । अमनप्रीत सिंघ जनरल सकत्तर ने बताया कि शनिवार को श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का पृथम प्रकाश भादों सुदी 1 संमत 1661 मुताबिक सितंबर 1604 ईसवी में श्री अमृतसर साहिब में पांचवे पातशाह (गुरु) श्री गुरू अरजन देव जी द्वारा किया गया। उस समय पहले ग्रंथी बाबा बुढा जीं बनाये0 गये, श्री गुरू ग्रंथ साहिब जी को उस समय पोथी साहिब कहा जाता था। श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी में श्री गुरू नानक देव जी (974 शब्द एवं श्लोक), श्री गुरू अंगद देव जी (63 श्लोक), श्री गुरू अमरदास जी (907 पद एंव श्लोक), श्री गुरु रामदास जी (679 पद एवं श्लोक), श्री गुरू अरजन देव जी (2218 पद एवं श्लोक), श्री गुरु तेग बहादुर जी (115 पद एवं श्लोक) की बाणी दर्ज है। इसके अलावा 15 भगतों जी की बाणी दर्ज है। वही भारतीय इतिहास में पहली बार, छोटी जाति में जन्में भगत जनो को को किसी उंची कुल/परिवार में जन्मे गुरू ने अपने बराबर की गुरू बाणी के साथ श्री गुरु ग्रंथ साहिब में शामिल किया गया है। इस के अलावा 11 भटों के स्वईये भी गुरु ग्रंथ साहिब में दर्ज है। नगर कीरतन गुरूद्वारा संत भागमल जी देहरादून रोड से प्रातः 7 बजे आरम्भ होकर घंटा घर, गुरु तेग बहादुर मार्ग, कुतुबशेर चौक, अम्बाला रोड, पटेल नगर, सुभाष नगर, अमर कुटीया, गली माधो प्रसाद, गरुद्वारा रोड से गुरुद्वारा श्री गुरू सिंह सभा पर सम्पन्न हुआ। जगह जगह श्रद्वालुओं ने स्टाल लगाकर प्रसाद वितरित किया एवं गुरुद्वारा श्री गुरू सिंह सभा में डा० रूपेश कुमार आयुक्त सहारनपुर मंडल, अरविन्द चौहान जिलाधिकारी सहारनपुर व स० हनीत सिंह स्टेशन अधीक्षक कर्मशियल सहारनपडु ने गुरू घर की हाजरी भर के गुरू महाराज का आर्शीवाद लिया। नगर कीरतन के आयोजन का संचालन प्रधान स०सुजसबीर सिंघ , सीनीयर मीत प्रधान, प्रभजोत सिंघ , जनरल सकत्तर अमनप्रीत सिंघ , (गुरपुरब कनवीनर मीत प्रधान प्रमिन्द्र सिंघ कोहली , मीत सकत्तर छवप्रीत सिंघ , तरुणदीप सिंघ शानू , तरनजीत सिंह सन्नी बग्गा के साथ प्रितीपाल सिंघ जुनेजा , करनदीप सिंघ, रनजीव सिंघ हर जी, हरेन्द्र सिंघ चडढा जी, तजिन्द्र सिंघ डंग जी, ईन्द्रजीत सिंघ खालसा , ईन्द्रप्रीत सिंघ चडढा , एम०पी० सिंघ चावला , बलबीर सिंघ धीर , ईन्द्रजीत सिंघ बतरा,जगमोहन सिंघ जसबीर सिंघ बग्गा, तीनो स्कूलो के प्रबन्धक सतविन्द्र सिंघ माकन जी, गुरविन्द्र सिंघ कालरा, जसवंत सिंघ बतरा , डा०स्वर्णजीत सिंघ , दलजीत सिंघ बवेजा , हरप्रीत सिंघ . गुरदियाल सिंघ , बलबीर सिंघ भाटीया ,परमजीत सिंघ चडढा, दीदार सिंघ सेठी , परविन्द्रपाल सिंह सोनी , तेजपाल सिंघ चरनजीत सिंघ ,रघुबीर सिंघ जी, गुरप्रीत सिंघ बग्गा , ईन्दजीत सिंघ गुरकिरपा , गुरमीत सिंघ शंटी , उपकार सिंघ सेठी , कंवलजीत सिंह बतरा एवं अन्य संगत द्वारा किया गया।
