मनीष अग्रवाल
सहारनपुर । उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पारंपरिक कारीगरों एवं माटीकला से जुड़े लोगों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से संचालित मुख्यमंत्री माटीकला रोजगार योजना जनपद सहारनपुर में अपने उद्देश्य को सार्थक कर रही है। योजना के माध्यम से जहां पारंपरिक माटीकला को बढ़ावा मिल रहा है, वहीं कारीगरों को स्वरोजगार से जोड़कर उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने का कार्य भी किया जा रहा है। इसी क्रम में उ0प्र0 माटीकला बोर्ड, सहारनपुर के अंतर्गत मुख्यमंत्री माटीकला रोजगार योजना का लाभ ग्राम जडौदा पाण्डा, सहारनपुर निवासी देवेन्द्र कुमार पुत्र श्री चन्द्र सिंह को मिला। उनके द्वारा योजना के अंतर्गत आवेदन किया गया, जिसके आधार पर पंजाब नेशनल बैंक, जडौदा पाण्डा, सहारनपुर द्वारा दो लाख रुपये का ऋण स्वीकृत एवं वितरित किया गया। ऋण प्राप्त होने के उपरांत उ0प्र0 माटीकला बोर्ड द्वारा देवेन्द्र कुमार को 07 दिवस का प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया। प्रशिक्षण से उनके पारंपरिक कौशल में और अधिक निखार आया तथा मिट्टी से बने उत्पादों को बेहतर गुणवत्ता एवं कम समय में तैयार करने में उन्हें काफी सहायता मिली। योजना की विशेष उपलब्धि यह रही कि देवेन्द्र कुमार को स्वीकृत ऋण के सापेक्ष 25 प्रतिशत अनुदान धनराशि भी प्रदान की गई। इससे उन्हें अपना स्वरोजगार स्थापित करने और व्यवसाय को आगे बढ़ाने में आर्थिक सहयोग मिला। वर्तमान में देवेन्द्र कुमार द्वारा मिट्टी से विभिन्न प्रकार के फ्लावर पॉट, गमले, पानी के फैन्सी कैम्पर, ग्लास सहित अन्य आकर्षक उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। उनके उत्पादों की आस-पास के शहरों में बिक्री हो रही है। इससे उनके स्वरोजगार को गति मिली है और उनकी आर्थिक स्थिति में भी सकारात्मक सुधार आया है।
माटीकला के क्षेत्र में उनकी प्रतिभा और मेहनत को उस समय एक और बड़ी उपलब्धि मिली, जब मण्डल स्तरीय माटीकला पुरस्कार योजना के अंतर्गत उनके द्वारा तैयार किए गए उत्पादों का प्रदर्शन किया गया। उनके उत्कृष्ट उत्पादों का चयन प्रथम स्थान के लिए किया गया तथा विभाग द्वारा उन्हें 15 हजार रुपये की पुरस्कार धनराशि प्रदान की गई। देवेन्द्र कुमार ने मुख्यमंत्री माटीकला रोजगार योजना के लिए प्रदेश सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए ऋण, प्रशिक्षण और अनुदान ने उनके पारंपरिक हुनर को स्वरोजगार में बदलने का अवसर दिया है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार की यह योजना और सहयोग नहीं मिलता तो अपने कार्य को इस स्तर तक आगे बढ़ाना उनके लिए कठिन होता। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा माटीकला जैसे पारंपरिक व्यवसाय को प्रोत्साहन देकर कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सराहनीय कार्य किया जा रहा है। प्रशिक्षण से उनके काम की गुणवत्ता में सुधार हुआ और ऋण एवं अनुदान की सहायता से वे अपने व्यवसाय को आगे बढ़ा सके। उन्होंने अन्य माटीकला कारीगरों एवं बेरोजगार युवाओं से भी अपील की कि वे सरकार की स्वरोजगारपरक योजनाओं की जानकारी प्राप्त कर उनका लाभ उठाएं और अपने हुनर को रोजगार एवं आय का माध्यम बनाएं।
मुख्यमंत्री माटीकला रोजगार योजना के माध्यम से देवेन्द्र कुमार की सफलता इस बात का उदाहरण है कि सरकारी योजनाओं का सही उपयोग, मेहनत और हुनर के साथ मिलकर आत्मनिर्भरता की नई राह खोल सकता है। यह सफलता अन्य पारंपरिक कारीगरों और युवाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत है।
