नीरज प्रजापति

भारतीय किसान मजदूर संयुक्त मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी शाह आलम ने प्रशासनिक कार्रवाई पर उठाए सवाल, बोले न मुकदमों से डरेंगे और न जेल जाने से पीछे हटेंगे

मुजफ्फरनगर। किसान-मजदूरों की आवाज उठाने को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई का सामना करने का दावा करते हुए भारतीय किसान मजदूर संयुक्त मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी शाहआलम ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। हाउस अरेस्ट किए जाने के विरोध में संगठन का आक्रोश खुलकर सामने आया। संगठन की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला दहन कर विरोध जताया गया। साथ ही पुलिस प्रशासन को ज्ञापन सौंपने से इनकार करते हुए इसे सीधे शासन तक पहुंचाने की मांग उठाई गई। इस घटनाक्रम ने संगठन और प्रशासन के बीच टकराव के हालात को चर्चा में ला दिया है। चौधरी शाहआलम ने पत्रकारों से वार्ता करते हुए दावा किया कि प्रशासन ने उन्हें पिछले दिन से ही हाउस अरेस्ट कर रखा है। उनका आरोप है कि दबे-कुचले वर्गों, किसानों और मजदूरों के अधिकारों की बात उठाने वाले लोगों को रोकने तथा उनकी आवाज दबाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि रास्तों में रोकने, हाउस अरेस्ट करने और मुकदमों का भय दिखाने जैसी कार्रवाई से जनसमस्याओं को उठाने वाले संगठनों को कमजोर नहीं किया जा सकता।
राष्ट्रीय अध्यक्ष ने इस कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी बात रखने और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने का अधिकार महत्वपूर्ण है। यदि जनसमस्याओं को सामने रखने वालों को ही रोका जाएगा, तो आम लोगों की परेशानियों को शासन तक पहुंचाने का रास्ता कैसे खुलेगा। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने दावा किया कि मोर्चे के करीब 35 से 40 जिला अध्यक्षों तथा हजारों कार्यकर्ताओं को अलग-अलग स्थानों पर हाउस अरेस्ट या गिरफ्तार किया गया है। हालांकि, इन आंकड़ों और कार्रवाई की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। संगठन ने इसे अपने कार्यकर्ताओं की गतिविधियों पर अंकुश लगाने की कोशिश बताते हुए कड़ा विरोध जताया।
चौधरी शाहआलम ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसान, मजदूर और छात्र अपने अधिकारों की लड़ाई से पीछे हटने वाले नहीं हैं। उनके मुताबिक, मुकदमों और जेल जाने का डर दिखाकर आंदोलनकारी आवाजों को शांत नहीं कराया जा सकता। उन्होंने कहा कि संगठन अपने मुद्दों को मजबूती से उठाता रहेगा और किसी भी दबाव के आगे झुकने को तैयार नहीं है। राष्ट्रीय अध्यक्ष को हाउस अरेस्ट किए जाने के विरोध में संगठन के कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला दहन किया। संगठन ने पुलिस प्रशासन को ज्ञापन देने से इनकार करते हुए मांग की कि ज्ञापन सीधे शासन को सौंपा जाए। इस रुख से साफ है कि संगठन अपनी मांगों को उच्च स्तर तक पहुंचाने पर जोर दे रहा है। चौधरी शाहआलम ने कहा कि अत्याचार और दबाव के बावजूद संगठन की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने दावा किया कि किसान-मजदूर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे और किसी भी परिस्थिति में पीछे नहीं हटेंगे। इस मौके पर संगठन के सैकड़ों पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे ।

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