कानपुर, 09 अक्टूबर । चिकित्सा शिक्षा और शोध के लिए देहदान करना समाज के प्रति महत्वपूर्ण योगदान है। इसी भावना के साथ उन्नाव निवासी 82 वर्षीय सिद्धनाथ श्रीवास्तव की पार्थिव देह शुक्रवार को जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज को समर्पित की गई। उन्होंने वर्ष 2006 में देहदान का संकल्प लिया था, जिसे दो दशक बाद उनके परिजनों ने पूरा किया। युग दधीचि देहदान महायज्ञ के अभियान प्रमुख मनोज सेंगर ने बताया कि सिद्धनाथ श्रीवास्तव का निधन होने के बाद उनके नाती ऋषि श्रीवास्तव ने देहदान के लिए संपर्क किया था।
एबी नगर, कॉलेज रोड, उन्नाव निवासी सिद्धनाथ श्रीवास्तव पूर्व आयकर अधिकारी, अधिवक्ता और वरिष्ठ गायत्री साधक थे। गुरुवार शाम कानपुर के एक निजी अस्पताल में उनका निधन हो गया था। इसके बाद उनके नाती ऋषि श्रीवास्तव ने अभियान प्रमुख मनोज सेंगर से संपर्क कर देहदान की प्रक्रिया पूरी कराने का आग्रह किया। आवश्यक दस्तावेज तैयार किए जाने के बाद शुक्रवार सुबह मेडिकल कॉलेज के वाहन से उनकी पार्थिव देह जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के एनाटॉमी विभाग पहुंचाई गई। वहां सम्मानपूर्वक देहदान की प्रक्रिया पूरी की गई। युग दधीचि देहदान महायज्ञ के तहत यह 327वां देहदान रहा।
अभियान की महासचिव माधवी सेंगर ने बताया कि सिद्धनाथ श्रीवास्तव ने वर्ष 2006 में ही देहदान का संकल्प ले लिया था। उनके निधन के बाद परिजनों ने इस संकल्प को निभाते हुए चिकित्सा शिक्षा के लिए उनकी पार्थिव देह दान की। इससे भावी चिकित्सकों को अध्ययन और प्रशिक्षण में सहायता मिलेगी।
दिवंगत सिद्धनाथ के नाती ऋषि श्रीवास्तव ने बताया कि उनके नाना गायत्री परिवार से गहराई से जुड़े थे। उन्होंने गायत्री परिवार के विराट अश्वमेध यज्ञों में सक्रिय भागीदारी की थी और गायत्री शक्तिपीठ, उन्नाव में भी लगातार सेवाएं देते रहे। उनके जीवन में धार्मिक आस्था और सेवा का विशेष महत्व था।
मेडिकल कॉलेज में देह समर्पण के दौरान परिवार की बहू-बेटियों ने आरती उतारी और मंत्रोच्चार के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी। इस मौके पर मनोज सेंगर और माधवी सेंगर के अलावा दिवंगत की बेटी शशिबाला, दामाद आनंद श्रीवास्तव, बेटे शिव सागर श्रीवास्तव, नाती ऋषि श्रीवास्तव और यश श्रीवास्तव, छोटे भाई जगदीश प्रसाद श्रीवास्तव और लक्ष्मीकांत श्रीवास्तव मौजूद रहे। गायत्री परिवार की ओर से सुरेश कुमार मिश्रा और सत्येंद्रनाथ गुप्ता सहित बड़ी संख्या में परिजन भी उपस्थित रहे।
