विभाग ने खोला पूरा राज प्रीपेड से पोस्टपेड मीटर बना विवाद की जड़

नीरज प्रजापति

मुजफ्फरनगर। बिजली के बढ़ते बिलों को लेकर प्रदेश के कई हिस्सों में उपभोक्ताओं के बीच असमंजस और नाराजगी का माहौल है। बढ़ी हुई बिल राशि को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं, लेकिन बिजली विभाग का दावा है कि वास्तविकता कुछ और है। विभाग के अनुसार अधूरी और भ्रामक जानकारी के कारण उपभोक्ताओं में भ्रम की स्थिति पैदा की जा रही है, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि भीषण गर्मी, तेज धूप और रात के अंधेरे में भी विद्युत कर्मचारी उपभोक्ताओं तक निर्बाध बिजली पहुंचाने के लिए लगातार मेहनत करते हैं। फाल्ट ठीक करने से लेकर आपूर्ति सुचारु रखने तक कर्मचारी हर मौसम में अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं, लेकिन इसके बावजूद विभाग को गलत सूचनाओं के आधार पर निशाना बनाया जा रहा है।
अधिकारियों के अनुसार बिजली बिल की राशि मनमाने ढंग से नहीं बढ़ाई जाती। वित्तीय वर्ष, स्वीकृत विद्युत लोड, वास्तविक बिजली खपत तथा विभागीय नियमों के अनुसार ही बिल तैयार किया जाता है। इसलिए हर बढ़ा हुआ बिल किसी अतिरिक्त वसूली का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
विभाग ने प्रीपेड और पोस्टपेड मीटर को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की है। विभाग का कहना है कि पोस्टपेड मीटर को प्रीपेड मीटर में बदलने के दौरान उपभोक्ताओं से कोई अलग शुल्क नहीं लिया गया था। लेकिन जिन उपभोक्ताओं ने बाद में दोबारा पोस्टपेड मीटर लगवाया, उनसे मीटर परिवर्तन का निर्धारित शुल्क लिया गया। यही शुल्क कई उपभोक्ताओं के बिजली बिल में जुड़कर दिखाई दे रहा है, जिसे लेकर भ्रम फैल गया।
विभाग का कहना है कि कुछ लोग उपभोक्ताओं को सही जानकारी देने के बजाय गलत तथ्यों के आधार पर भड़काने का प्रयास कर रहे हैं। इससे आम जनता में भ्रम पैदा हो रहा है और विभाग की छवि भी प्रभावित हो रही है। अधिकारियों का मानना है कि यदि उपभोक्ता सीधे विभाग से जानकारी लें और अफवाहों पर ध्यान न दें तो अधिकांश विवाद स्वतः समाप्त हो सकते हैं।
बिजली विभाग ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि यदि किसी भी बिल को लेकर कोई शंका हो तो संबंधित विद्युत कार्यालय से संपर्क कर पूरी जानकारी प्राप्त करें और अपुष्ट सूचनाओं पर विश्वास न करें।

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