अयोध्या, 25 सितंबर ।भारत की राष्ट्रीय चेतना, स्वतंत्रता संग्राम की प्रेरणा और मातृभूमि के प्रति श्रद्धा के अमर गीत ‘वन्दे मातरम्’ के 150वें वर्ष के उपलक्ष्य में विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान के तत्वावधान में देशव्यापी सामूहिक गायन अभियान ‘नमामि भारतम्’ के अंतर्गत शिवदयाल जायसवाल सरस्वती विद्या मंदिर इण्टर कॉलेज, तुलसीनगर में शुक्रवार को भव्य सामूहिक गायन कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में विद्यालय के 1074 विद्यार्थी, शिक्षक, अभिभावक तथा समाज के विभिन्न वर्गों के नागरिकों ने एक समय, एक स्वर और एक लय में सम्पूर्ण ‘वन्दे मातरम्’ का सामूहिक गायन किया। वातावरण राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीय चेतना से ओत-प्रोत हो गया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता गोपाल राम मिश्र ने कहा कि वंदे मातरम् सिर्फ गीत नहीं बल्कि समाज के लिए प्रेरणा जागृत करने वाला ऐसा मंत्र है जिसे लेकर समाज और इस राष्ट्र में अपने जीवन को एक नई ऊंचाई पर पहुंचने का कार्य किया है I
“वंदे मातरम्” का अर्थ है—“हे मातृभूमि! मैं आपको नमन करता हूँ।” यह भारत के राष्ट्रीय गीत के रूप में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इसकी रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी। यह गीत स्वतंत्रता आंदोलन के समय देशवासियों में देशभक्ति, एकता और राष्ट्रप्रेम की भावना जगाने का महत्वपूर्ण माध्यम बना।
“वंदे मातरम्” में भारतभूमि को माँ के रूप में सम्मान दिया गया है। इसके शब्द हमें अपनी मातृभूमि के प्रति सम्मान, प्रेम और समर्पण की भावना का संदेश देते हैं।
कार्यक्रम के अध्यक्ष राजकुमार दास ने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य केवल सामूहिक गायन तक सीमित नहीं है, बल्कि नई पीढ़ी को ‘वन्दे मातरम्’ की ऐतिहासिक यात्रा, उसके राष्ट्रीय महत्व तथा स्वतंत्रता संग्राम की प्रेरणादायी विरासत से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि ‘वन्दे मातरम्’ भारतीय जनमानस में मातृभूमि के प्रति श्रद्धा और राष्ट्रीय चेतना का भाव जागृत करने वाला प्रेरणास्रोत रहा है।
इस ऐतिहासिक आयोजन के अवसर पर मुख्य अतिथि संदीप धुरिया महामंत्री, पंजाब प्रांत , मुख्य वक्ता गोपाल राम संभाग निरीक्षक, साकेत संभाग, अवनि कुमार शुक्ल प्रधानाचार्य/संकुल प्रमुख तथा ऋषभ नारायण वाजपेई प्रधानाचार्य, विद्या भारती विद्यालय की गरिमामयी उपस्थिति रही।
