भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को जल्द ही अकबर रोड स्थित अपना पुराना कार्यालय खाली करना पड़ सकता है, जिस पर पार्टी 1978 से काबिज है और जो राष्ट्रीय राजधानी के लुटियंस क्षेत्र में पार्टी की उपस्थिति से घनिष्ठ रूप से जुड़ा हुआ है। पार्टी अधिकारियों ने बताया कि हाल ही में एक बेदखली नोटिस भेजा गया है, जिसमें संगठन को 28 मार्च तक परिसर खाली करने के लिए कहा गया है। हालांकि, इसको लेकर सियासी बवाल शुरू हो चुका है।

 

कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने इसको लेकर कहा कि यह सिलसिला कुछ समय से चल रहा है, लेकिन नई ज़मीन और कार्यालय आवंटित किए गए हैं और शायद यह उसी के अनुरूप है, लेकिन अगर इसे कांग्रेस पर लागू किया जा रहा है, तो इसे उन सभी अन्य पार्टियों पर भी लागू किया जाना चाहिए जो बंगलों को अपने कार्यालयों के रूप में इस्तेमाल कर रही हैं। कांग्रेस सांसद अमरिंदर सिंह राजा वारिंग ने कहा कि उन्हें लगता है कि कांग्रेस के पद को छीनकर वे कांग्रेस को डरा सकते हैं

 

कांग्रेस को अकबर रोड स्थित 24 नंबर के कार्यालय को खाली करने के नोटिस पर पार्टी सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि भाजपा सरकार लोकतांत्रिक सरकार नहीं है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है। नोटिस हम तक पहुंचने दीजिए। हम चर्चा के बाद इस पर कार्रवाई करेंगे। सांसद इमरान मसूद ने कहा कि सरकार सोचती है कि हम पर दबाव बनाकर कांग्रेस को चुप करा सकती है। उन्हें हमें डराने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। क्या उन्होंने भाजपा का कार्यालय 11, अशोक रोड पर या पंत मार्ग पर खोला है?…क्योंकि वे ईरान युद्ध के संबंध में कुछ नहीं कर पाए हैं, इसलिए वे इस मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं।

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