पिछड़ों और मुस्लिम समाज की साझी राजनीतिक ताकत का दावा, 300 यूनिट मुफ्त बिजली, सस्ती शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य और सभी को आवास देने का किया वादा
नीरज प्रजापति
मुजफ्फरनगर। प्रगतिशील सदभावना मंच ने उत्तर प्रदेश की आगामी विधानसभा चुनाव-2027 को लेकर अपनी राजनीतिक रणनीति का बड़ा ऐलान करते हुए दावा किया कि अब प्रदेश की राजनीति में पिछड़ा, अति पिछड़ा और मुस्लिम समाज निर्णायक भूमिका निभाएगा। वर्षों से सत्ता में रही राजनीतिक पार्टियों ने इन वर्गों को केवल वोट बैंक समझा, लेकिन उनके सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक विकास के लिए कोई ठोस कार्य नहीं किया, अब जनता बदलाव का मन बना चुकी है और वर्ष 2027 का चुनाव प्रदेश की राजनीति में नया अध्याय लिखेगा।
बुधवार को मुजफ्फरनगर के रुड़की रोड स्थित होटल ग्रीन ऐप्पल में आयोजित प्रेस वार्ता में आल इंडिया आवाम-ए-हिंद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट राव नदीम ने अपने दर्जनों पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ मीडिया सेंटर के पत्रकारों के साथ प्रेस वार्ता का आयोजन किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि प्रगतिशील सदभावना मंच अन्य पिछड़ा वर्ग और मुस्लिम समाज सहित कई सामाजिक एवं राजनीतिक संगठनों का साझा गठबंधन है, जिसका उद्देश्य समाज के वंचित वर्गों को उनका अधिकार और सम्मान दिलाना है।
राव नदीम ने कहा कि देश को आजाद हुए कई दशक बीत चुके हैं, लेकिन आज भी गरीब, पिछड़े और अति पिछड़े वर्ग को बराबरी का अधिकार और विकास में उचित भागीदारी नहीं मिल सकी है। हर चुनाव में इन वर्गों के नाम पर बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन सत्ता में पहुंचने के बाद उन्हें भुला दिया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि विकास योजनाएं केवल सरकारी फाइलों और कागजों तक सीमित रह जाती हैं, जबकि धरातल पर आम जनता को उनका लाभ नहीं मिल पाता।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जब भी पिछड़े और वंचित समाज अपने अधिकारों की बात करता है तो उसे धर्म और जाति के मुद्दों में उलझाने का प्रयास किया जाता है। समाज अब इस राजनीति को समझ चुका है और केवल धार्मिक नारों के बजाय विकास, शिक्षा, रोजगार और राजनीतिक भागीदारी चाहता है। इस दौरान शुक्रमपाल कश्यप राष्ट्रीय अध्यक्ष मजदूर किसान यूनियन पार्टी ने कहा कि अब अति पिछड़ा वर्ग धर्म की राजनीति से ऊपर उठकर अपने अधिकारों और हिस्सेदारी की लड़ाई लड़ने के लिए तैयार है। उन्होंने बिहार में कराई गई जातीय जनगणना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वहां अन्य पिछड़ा वर्ग की आबादी 63 प्रतिशत सामने आई थी। उनका दावा था कि उत्तर प्रदेश में भी पिछड़े वर्ग की संख्या लगभग इसी अनुपात में है, जबकि प्रदेश की करीब 300 विधानसभा सीटों पर मुस्लिम मतदाता भी प्रभावी भूमिका निभाते हैं। ऐसे में प्रगतिशील सदभावना मंच का सामाजिक आधार मजबूत है और यही गठबंधन आगामी विधानसभा चुनाव में बड़ा राजनीतिक विकल्प बनकर उभरेगा।
वहीं देवेंद्र सिंह गुर्जर राष्ट्रीय अध्यक्ष राष्ट्रीय जनता दल ने कहा कि उनका गठबंधन किसी धर्म विशेष की राजनीति नहीं करेगा, बल्कि संविधान की भावना के अनुरूप सभी धर्मों का सम्मान करते हुए समान विकास की नीति अपनाएगा। उन्होंने नारा दिया कि हिन्दू-मुस्लिम साथ चलेगा, सदभावना से राज चलेगा। उनका कहना था कि समाज में भाईचारा और सामाजिक न्याय स्थापित करना ही मंच का मुख्य उद्देश्य है। इसके अलावा बाबू रामपाल राष्ट्रीय अध्यक्ष राष्ट्रीय उदय पार्टी ने मंच की प्रस्तावित नीतियों की जानकारी देते हुए कहा कि सरकार बनने पर शिक्षा व्यवस्था को सस्ती, सुलभ और समान बनाया जाएगा। प्रत्येक नागरिक को सरकारी स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। सभी जरूरतमंद परिवारों के लिए बेहतर आवास योजना लागू की जाएगी। न्याय व्यवस्था को सस्ता, सुलभ और शीघ्र बनाया जाएगा। इसके अलावा प्रत्येक घरेलू बिजली उपभोक्ता को 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने का भी वादा किया गया। इस दौरान प्रगतिशील सद्भावना मंच ने विधानसभा चुनाव-2027 के लिए अपनी पहली प्रत्याशी सूची भी जारी कर दी। गठबंधन ने मुजफ्फरनगर की बुढाना विधानसभा सीट से एडवोकेट राव नदीम, चरथावल विधानसभा सीट से सुक्रमपाल कश्यप तथा बिजनौर सदर विधानसभा सीट से करतार सिंह कश्यप को अपना प्रत्याशी घोषित किया। प्रगतिशील सद्भावना मंच ने दावा किया कि तीनों उम्मीदवार मजबूत सामाजिक आधार रखते हैं और चुनाव में जीत दर्ज करेंगे।
इस दौरान प्रगतिशील सद्भावना मंच के नेताओं ने विश्वास जताया कि प्रदेश की जनता अब पारंपरिक राजनीति से बदलाव चाहती है और इसका सीधा लाभ प्रगतिशील सदभावना मंच को मिलेगा। उनका कहना था कि आने वाले विधानसभा चुनाव में सदभावना, सामाजिक न्याय और विकास के मुद्दों पर जनता का व्यापक समर्थन गठबंधन के पक्ष में दिखाई देगा।
