बिहार के खगड़िया जिले में सरकारी विभागों में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी विभाग ने शुक्रवार को सख्त कार्रवाई की। डीआरडीए परिसर स्थित स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन (LAO) कार्यालय में तैनात प्रमंडलीय लेखा अधिकारी शिशिर कुमार राम को 18 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया गया।

पूरा मामला क्या है?

पीड़ित संवेदक संजय कुशवाहा ने बालू आपूर्ति का कार्य किया था, जिसका बकाया भुगतान 10 लाख 50 हजार रुपये लंबित था। मूल बिल खो जाने के कारण उन्होंने फोटोकॉपी जमा की, जिसे जूनियर इंजीनियर और असिस्टेंट इंजीनियर ने पास कर दिया। लेकिन प्रमंडलीय लेखा अधिकारी शिशिर कुमार राम ने फाइल को जानबूझकर रोक लिया।

संवेदक के अनुसार: पहले अधिकारी ने 20 हजार रुपये की मांग की। बाद में सौदा 18 हजार रुपये पर फाइनल हुआ। पिछले दो महीनों से उन्हें लगातार परेशान किया जा रहा था। पहले फंड न आने का बहाना बनाया गया, फिर सीधे रिश्वत मांगी गई। संजय कुशवाहा ने आरोप लगाया कि विभाग में कई अन्य ठेकेदार भी इसी तरह की परेशानी का शिकार हैं।

निगरानी विभाग ने कैसे जाल बिछाया?

परेशान होकर संवेदक ने पटना स्थित निगरानी विभाग में लिखित शिकायत की। शिकायत की सत्यता जांचने के बाद विभाग ने गुप्त ऑपरेशन चलाया। शुक्रवार को 9 सदस्यीय टीम खगड़िया पहुंची और कार्यालय के आसपास छिपकर तैनात हो गई। जैसे ही संजय कुशवाहा ने तय राशि 18 हजार रुपये नकद लेखा अधिकारी को सौंपी, टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उन्हें रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के तुरंत बाद आरोपी अधिकारी को हिरासत में लेकर पटना ले जाया गया।

निगरानी विभाग का बयान

निगरानी विभाग के डीएसपी श्याम बाबू ने बताया कि “संवेदक की शिकायत की पूरी तरह जांच की गई और आरोप सही पाए गए। इसके आधार पर ही यह सफल ट्रैप लगाया गया। भ्रष्टाचार के खिलाफ यह कार्रवाई जारी रहेगी।”यह गिरफ्तारी बिहार में सरकारी भुगतान प्रक्रिया में व्याप्त रिश्वतखोरी के खिलाफ एक बड़ा संदेश मानी जा रही है।

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