बिहार के अररिया जिले में जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 68 पंचायत सचिवों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। जिला जनसंपर्क पदाधिकारी शंभू रजक ने सोमवार को बताया कि संबंधित पंचायत सचिव लंबे समय से अपने कार्यस्थल से अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित थे और अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चल रहे थे। इससे पंचायत स्तर पर संचालित कई महत्वपूर्ण सरकारी कार्य पूरी तरह प्रभावित हो रहे थे।

शंभू रजक ने बताया कि पंचायत सचिवों की अनुपस्थिति के कारण जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र निर्गत करने, वंशावली तैयार करने, सामाजिक सुरक्षा पेंशन सत्यापन, षष्ठम राज्य वित्त आयोग एवं 15वीं केंद्रीय वित्त आयोग योजनाओं के क्रियान्वयन, मुख्यमंत्री सात निश्चय योजना सहित पंचायतों के दैनिक कार्यों पर प्रतिकूल असर पड़ा। इसके अलावा भारत की जनगणना-2027 का कार्य भी प्रभावित हो रहा था, जिससे आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था।

जिला जनसंपर्क पदाधिकारी ने बताया कि 29 अप्रैल 2026 को जारी पत्र के माध्यम से हड़ताल पर रहने वाले पंचायत सचिवों से तीन दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया था, लेकिन संबंधित कर्मियों द्वारा कोई जवाब नहीं दिया गया। सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों ने भी प्रतिवेदन में बताया कि संबंधित पंचायत सचिव अब तक अपने कार्यस्थल पर उपस्थित नहीं हुए हैं। इसके बाद पंचायती राज विभाग, बिहार के निदेशक एवं सचिव द्वारा जारी निर्देशों के आलोक में हड़ताल और अनाधिकृत अनुपस्थिति में रहने वाले पंचायत सचिवों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए 68 पंचायत सचिवों को निलंबित किया गया है।

निलंबन अवधि के दौरान संबंधित पंचायत सचिवों का मुख्यालय विभिन्न प्रखंडों में निर्धारित किया गया है। साथ ही उन्हें नियमानुसार केवल जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा। सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि संबंधित पंचायत सचिवों के विरुद्ध आरोप पत्र तैयार कर 24 घंटे के भीतर जिला पंचायत राज कार्यालय, अररिया में उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें।

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