झारखंड हाईकोर्ट में आदिवासी बुद्धिजीवी मंच द्वारा दायर पेसा नियमावली लागू न होने पर अवमानना याचिका पर सुनवाई हुई। इस दौरान राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि पेसा नियमावली का ड्राफ्ट तैयार कर कैबिनेट में भेजा जा चुका है।

राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि कोर्ट ने बालू घाट की नीलामी के बाद अलॉटमेंट पर लगी रोक हटाने के लिए दायर हस्तक्षेप याचिका (आईए) को स्वीकार कर प्रार्थी को नोटिस जारी किया। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने मौखिक रूप से कहा कि यदि पेसा नियमावली लागू हो जाती है तो कोर्ट उचित आदेश पारित करेगा। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से एक अहम आग्रह किया गया। सरकार ने अदालत से निवेदन किया कि बालू और लघु खनिजों के खनन पर जो अंतरिम रोक लगी है, उसे हटाया जाए।

अवमानना याचिका पर अगली सुनवाई 9 अक्टूबर को होगी। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के पंचायती राज विभाग के सचिव मनोज कुमार, महाधिवक्ता राजीव रंजन और अपर महाधिवक्ता जय प्रकाश कोर्ट में मौजूद थे। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत कुमार ने बहस की।

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