शुक्रवार को सालाना चित्रा पूर्णिमा उत्सव के दौरान केरल-तमिलनाडु सीमा पर पेरियार टाइगर रिज़र्व के अंदर स्थित ऐतिहासिक मंगला देवी मंदिर में हज़ारों भक्तों ने पूजा-अर्चना की। इस मौके पर अधिकारियों ने बताया कि यह प्राचीन मंदिर जिसके बारे में माना जाता है कि यह 1,000 साल से भी ज़्यादा पुराना है हर साल सिर्फ चित्रा महीने की पूर्णिमा के दिन ही भक्तों के लिए खुलता है और इस बार यहां दोनों राज्यों से तीर्थयात्रियों की भारी भीड़ उमड़ी। इडुक्की जिला प्रशासन ने बताया कि इस उत्सव का आयोजन केरल और तमिलनाडु की सरकारों ने मिलकर किया था। मंदिर में केरल और तमिलनाडु दोनों राज्यों की मंदिर परंपराओं के अनुसार विशेष पूजा-पाठ किए गए।

वहीं अधिकारियों ने बताया, मंदिर के दरवाज़े सुबह करीब 5.30 बजे खोले गए और उसके बाद पूजा-पाठ की रस्में शुरू हुईं। मंगला देवी की मूर्ति वाले मुख्य गर्भगृह और पास में ही गणपति तथा शिव-पार्वती को समर्पित मंदिरों में केरल शैली की पूजा-पाठ हुई जबकि पास ही स्थित दूसरे गर्भगृह में तमिलनाडु शैली की पूजा-पाठ की गई। अधिकारियों ने बताया कि मंदिर परिसर में एक गुफा का प्रवेश द्वार भी है जिसके बारे में माना जाता है कि यह चोल काल का है।

इडुक्की और थेनी ज़िलों के अधिकारियों ने पुलिस, राजस्व, वन, आबकारी, मोटर वाहन, स्वास्थ्य और अग्निशमन विभागों के सहयोग से इस उत्सव के लिए मिलकर इंतज़ाम किए। अधिकारियों ने बताया भक्तों के लिए पीने का पानी, भोजन, शौचालय और मलयालम तथा तमिल भाषाओं में दिशा-सूचक बोर्ड जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। सुरक्षा इंतज़ामों के तहत अलग-अलग जगहों पर मेडिकल टीमें, एम्बुलेंस, आपदा राहत कर्मी और अग्निशमन दल तैनात किए गए थे। इडुक्की के जिला कलेक्टर डॉ. दिनेशन चेरुवट्ट, जिला पुलिस प्रमुख साबू मैथ्यू के.एम., उप-कलेक्टर अनूप गर्ग और अन्य अधिकारियों ने मंदिर का दौरा किया और इंतज़ामों का जायज़ा लिया।

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