इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की कथित दोहरी नागरिकता मामले में सुनवाई बुधवार को टाल दी। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ के न्यायमूर्ति मनीष माथुर ने कहा कि याचिकाकर्ता ने 20 अप्रैल, 2026 के आदेश को वापस लेने की मांग करते हुए एक आवेदन दाखिल किया है। इसलिए मुख्य याचिका पर सुनवाई उक्त आवेदन के निस्तारण के बाद ही की जाएगी। कर्नाटक में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ता एस. विग्नेश द्वारा दायर एक याचिका पर यह आदेश पारित किया गया।

चैंबर में बदला फैसला: बिना पक्ष सुने FIR दर्ज करने के मौखिक आदेश पर नहीं किए दस्तखत
न्यायमूर्ति विद्यार्थी ने 17 अप्रैल को खुली अदालत में मौखिक रूप से आदेश देते हुए राहुल गांधी के खिलाफ दोहरी नागरिकता के आरोपों के संबंध में प्राथमिकी दर्ज करने और जांच करने का निर्देश दिया था। हालांकि, चैंबर में आदेश पर हस्ताक्षर करने से पूर्व, न्यायाधीश ने महसूस किया कि नोटिस जारी किए बगैर और आरोपी को अपना पक्ष रखने का अवसर दिए बगैर कोई प्रतिकूल आदेश पारित नहीं किया जा सकता। इसके परिणाम स्वरूप, इस आदेश पर हस्ताक्षर नहीं किया गया और इस मामले को 20 अप्रैल के लिए सूचीबद्ध किया गया।

सोशल मीडिया टिप्पणी पर भड़के जज, खुद को केस से अलग कर नई बेंच को सौंपा मामला
न्यायमूर्ति विद्यार्थी ने 20 अप्रैल को सुनवाई के दौरान अदालती सुनवाई को लेकर सोशल मीडिया पर याचिकाकर्ता द्वारा की गई टिप्पणी पर घोर नाराजगी व्यक्त की थी। बाद में उन्होंने इस मामले में सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था। इसके बाद मुख्य न्यायाधीश ने यह मामला सुनवाई के लिए न्यायमूर्ति मनीष माथुर के पास भेजा। याचिकाकर्ता ने अब एक आवेदन दाखिल कर न्यायमूर्ति विद्यार्थी द्वारा 20 अप्रैल को की गई टिप्पणियां वापस लेने की मांग की है।

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