वाराणसी, 26 मई । स्वदेशी जागरण मंच, काशी महानगर के तत्वावधान में मंगलवार को काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के कृषि विज्ञान संस्थान सभागार में “स्वदेशी उद्यमिता से आत्मनिर्भर काशी” विषयक एक दिवसीय विचार वर्ग का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बीएचयू के शिक्षाविदों, उद्यमियों तथा 100 से अधिक छात्र-छात्राओं ने सहभागिता की।
कार्यक्रम की संयोजक कविता मालवीय ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि वर्ष 1905 में स्वदेशी का प्रतीक चरखा था, जबकि 2026 में इसका स्वरूप चिप और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) बन चुका है। उन्होंने कहा कि बीएचयू से “काशी जीपीटी” जैसा स्वदेशी एआई मॉडल विकसित करने का लक्ष्य है, जो काशी के अंतिम व्यक्ति की भाषा में संवाद कर उसकी समस्याओं का समाधान कर सके। मुख्य अतिथि कृषि विज्ञान संस्थान, बीएचयू के संकायाध्यक्ष प्रो. उदय प्रताप सिंह ने कृषि आधारित उद्यमिता पर जोर देते हुए कहा कि एआई, ड्रोन तकनीक और मिट्टी परीक्षण किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि तकनीक आधारित कृषि भविष्य की आवश्यकता है।
विशिष्ट अतिथि प्रबंधन संकाय, बीएचयू के निदेशक प्रो. एस.के. दुबे ने कहा कि स्वदेशी उद्यमिता केवल आर्थिक नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्वाभिमान का विषय है। उन्होंने छात्रों से नौकरी मांगने की मानसिकता छोड़कर रोजगार सृजक बनने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि एआई का उपयोग काशी के जीआई उत्पादों, पर्यटन और सेवा क्षेत्र में वैल्यू एडिशन के लिए किया जाना चाहिए। “कम संसाधनों में अधिकतम उत्पादन” को प्रबंधन का मूल मंत्र बताते हुए उन्होंने स्वदेशी तकनीक को इसका आधार बताया।
बीएचयू की प्रो. बिंदा परांजपे ने उद्यमिता में मातृशक्ति की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए ‘लखपति दीदी’ अभियान की जानकारी दी। वहीं, डीएवी पीजी कॉलेज के अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. अनूप मिश्र ने विषय प्रवर्तन करते हुए केंद्रीय बजट की सराहना की और कहा कि मुद्रा लोन से लेकर भारतीय एआई मिशन तक, सरकार स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर रही है। मुख्य वक्ता बीएचयू के पत्रकारिता विभाग के प्रो. बाला लखेन्द्र ने “भाषा, भेष, भोजन, भवन, भ्रमण और भजन” के छह ‘भ’ के माध्यम से स्वदेशी चिंतन को व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने युवाओं से “चरखा से चिप तक” की यात्रा को आत्मविश्वास और स्वाभिमान के साथ आगे बढ़ाने का आह्वान किया। कार्यक्रम के एआई आधारित स्वदेशी उद्यमिता सत्र में बताया गया कि नो-कोड टूल्स की सहायता से छात्र बिना कोडिंग ज्ञान के भी “काशी टूर गाइड”, “बनारसी साड़ी डिजाइनर” और “एआई किसान सहायक” जैसे स्टार्टअप एक दिन में प्रारंभ कर सकते हैं। सम्मेलन में बीएचयू प्रबंधन संकाय में “जिला स्वावलंबन केन्द्र” प्रारंभ करने की घोषणा भी की गई। यह केंद्र प्रतिदिन शाम 4 से 6 बजे तक छात्रों को उद्यम पंजीकरण, जीएसटी और जेम पोर्टल संबंधी निःशुल्क सहायता उपलब्ध कराएगा।
कार्यक्रम में 26 मई से 15 अगस्त तक 500 नए स्वदेशी उद्यम पंजीकृत कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया। साथ ही, 9 अगस्त को आयोजित होने वाले “स्वदेशी रक्षाबंधन मेला” के माध्यम से एक करोड़ रुपये के कारोबार का लक्ष्य भी रखा गया। इस अवसर पर बनारसी साड़ी, लंगड़ा आम सहित काशी के 12 जीआई उत्पादों को एआई डिजाइन और ओएनडीसी प्लेटफॉर्म से जोड़कर वैश्विक बाजार उपलब्ध कराने का संकल्प लिया गया। कार्यक्रम में सहयोग देने वाले 20 छात्र स्वदेशी कार्यकर्ताओं को सेवा सम्मान पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन स्वदेशी जागरण मंच, काशी महानगर की संयोजिका कविता मालवीय ने किया। इस अवसर पर डॉ. पवन दुबे, प्रो. गीता राय, प्रेमशिला चतुर्वेदी, कुसुम पटेल, वीणा, नेहा, प्रेम सिंह, राधेश्याम, प्रभाकर जायसवाल, धीरू सिंह सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
