उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में धर्म परिवर्तन के बावजूद अनुसूचित जाति-जनजाति समाज को मिलने वाली सरकारी योजनाओं एवं आरक्षण का लाभ लेने वालों पर उच्च न्यायालय से गाज गिर सकती है। अदालत ने याचिकाकर्ता को ऐसे सभी लोगों को पक्षकार बनाने के निर्देश दिए हैं।

पिथौरागढ़ निवासी दर्शनलाल की ओर से दायर जनहित याचिका पर सोमवार को सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता एवं न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने ये निर्देश जारी किए। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि पिथौरागढ़ जिले में कुछ लोगों ने धर्मांतरण कर क्रिश्चियन (ईसाई) धर्म अपना लिया। आशंका जताई कि इनमें से कुछ लोग हिन्दू धर्म में अनुसूचित जाति -जनजाति को मिलने वाली सरकारी योजनाओं और आरक्षण का लाभ ले रहे हैं।

तीन सप्ताह बाद होगी अगली सुनवाई
कहा गया कि यह प्रावधानों के खिलाफ है। धर्मांतरण के बाद क्रिश्चियन धर्म अपनाने वाले लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल सकता है। यह भी आरोप लगाया गया कि इसके चलते पात्र लोग वंचित हो रहे हैं और उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। याचिकाकर्ता ने अदालत से इस पर रोक लगाने और उचित दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है। अंत में अदालत ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिए कि तीन सप्ताह में ऐसे सभी लोगों को पक्षकार बनायें। इस मामले में अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद होगी।

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