ग्रीनलैंड मॉडर्न जूनियर हाई स्कूल में साप्ताहिक योग चर्चा में गूंजा अध्यात्म का संदेश, योगाचार्य सुरेंद्र पाल सिंह आर्य बोले, परमात्मा की प्राप्ति और मोक्ष का सबसे श्रेष्ठ मार्ग है अष्टांग योग
नीरज प्रजापति
मुजफ्फरनगर। भारतीय योग संस्थान के निशुल्क योग साधना केंद्र, ग्रीनलैंड मॉडर्न जूनियर हाई स्कूल में आयोजित साप्ताहिक योग चर्चा आध्यात्मिक चेतना, स्वास्थ्य और आत्मकल्याण का प्रेरणादायी संगम बन गई। “योग क्यों” विषय पर आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में योगाचार्य सुरेंद्र पाल सिंह आर्य ने कहा कि संसार का प्रत्येक व्यक्ति दुखों से मुक्ति और स्थायी सुख की तलाश में है, लेकिन यह सुख धन, वैभव, परिवार या भौतिक संसाधनों से नहीं, बल्कि योग और परमात्मा से जुड़ने से ही प्राप्त हो सकता है।

उन्होंने कहा कि प्रकृति, आत्मा और परमात्मा तीनों अनादि और नित्य हैं। प्रकृति से मिलने वाले सभी सुख क्षणभंगुर हैं और प्रत्येक सांसारिक सुख के पीछे संस्कार दुख, ताप दुख, परिणाम दुख तथा गुणवृत्ति विरोध दुख जैसे अनेक कष्ट छिपे रहते हैं। परिवार और समाज भी पूर्ण सुख नहीं दे सकते, क्योंकि प्रत्येक संबंध किसी न किसी समय दुख का कारण बनता है। केवल परमात्मा ही आनंद स्वरूप है और उसी की प्राप्ति से जीवन में वास्तविक शांति एवं मोक्ष संभव है। उन्होंने कहा कि महर्षि पतंजलि द्वारा प्रतिपादित अष्टांग योग ही परमात्मा तक पहुंचने का सर्वोत्तम मार्ग है।
योगाचार्य ने कहा कि अधिकांश लोग योग केंद्रों पर रोगों से मुक्ति पाने की इच्छा लेकर आते हैं, लेकिन नियमित योगाभ्यास से न केवल उनका स्वास्थ्य बेहतर होता है, बल्कि उनका मन अध्यात्म की ओर भी अग्रसर होता है। योग व्यक्ति को केवल निरोग ही नहीं बनाता, बल्कि जीवन जीने की सही दिशा भी देता है।

कार्यक्रम में जिला प्रधान राज सिंह पुंडीर ने कहा कि योग शरीर और मन दोनों को स्वस्थ रखने का सबसे प्रभावी माध्यम है। योग से व्यक्ति सुख-दुख में समान भाव रखना सीखता है। उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने भी “समत्वं योग उच्यते” कहकर योग के महत्व को सर्वोच्च स्थान दिया है।
चौधरी मनोज कुमार खेड़ी ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि योग ने उनकी दिनचर्या को पूरी तरह अनुशासित बना दिया है। वहीं यशपाल बरवाला ने कहा कि नियमित योगाभ्यास से व्यक्ति के विचार सकारात्मक बनते हैं और उसका जीवन संतुलित होता है। जिला मंत्री राजीव रघुवंशी ने कहा कि योग आत्मज्ञान का द्वार खोलता है, जबकि केंद्र के संस्थापक एवं जिला बार संघ के पूर्व सचिव ओम सिंह तोमर एडवोकेट ने कहा कि नियमित योगाभ्यास से शरीर स्वस्थ रहता है और आयु में भी वृद्धि होती है।
कार्यक्रम की शुरुआत केंद्र प्रमुख कविंद्र बालियान द्वारा योग साधना से हुई। उन्होंने हाथ-पैरों के जोड़ों के दर्द, घुटनों की समस्या, कमर दर्द तथा मोटापे को दूर करने में सहायक विभिन्न योग क्रियाओं का अभ्यास कराया। इसके बाद योगाचार्य सुरेंद्र पाल सिंह आर्य ने हास्य आसन, अनुलोम-विलोम, कपालभाति और भ्रामरी प्राणायाम का अभ्यास कराते हुए उनके स्वास्थ्य लाभों की विस्तार से जानकारी दी।
विशेष बात यह रही कि कार्यक्रम के दौरान वर्षा होने के बावजूद योग साधकों का उत्साह तनिक भी कम नहीं हुआ। बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष साधकों ने पूरे मनोयोग से योगाभ्यास किया और यह संदेश दिया कि स्वास्थ्य और अध्यात्म के प्रति समर्पण किसी भी परिस्थिति में कमजोर नहीं पड़ता।
इस अवसर पर आचार्य रामकिशन सुमन, अशोक मित्तल, अंकित गर्ग, अमित गर्ग, क्षेत्रीय प्रधान नीरज बंसल, वीर सिंह, किशोर योग साधिका सलोनी, रेशु, मुनेश मान, गायत्री शर्मा, डॉ. अक्षय बालियान, रामपाल शर्मा, देवेंद्र पाल, राजेश्वर पाल, राकेश कुमार गोयल, रविंद्र धीमान सहित बड़ी संख्या में योग साधक एवं साधिकाएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन योग को जन-जन तक पहुंचाने और स्वस्थ, अनुशासित एवं आध्यात्मिक समाज के निर्माण के संकल्प के साथ हुआ।
