नीरज प्रजापति
कैबिनेट मंत्री की दो टूक, चुनाव आयोग पर सवाल उठाने वाले विपक्षी नेता पहले अपने पदों से इस्तीफा दें, लोकतंत्र और जनादेश को लेकर छिड़ी सियासी बहस ने पकड़ा तूल।
मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश की सियासत में चुनावी पारदर्शिता और कथित वोट चोरी का मुद्दा अब तीखे राजनीतिक टकराव का रूप लेता जा रहा है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की ओर से चुनाव प्रक्रिया और चुनाव आयोग को लेकर उठाए जा रहे सवालों के बीच प्रदेश सरकार के मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने विपक्ष पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने सवाल खड़ा किया कि यदि राहुल गांधी और अखिलेश यादव को चुनाव व्यवस्था पर भरोसा नहीं है और वे वोट चोरी के आरोप लगा रहे हैं, तो उन्हें अपने पदों पर बने रहने का नैतिक अधिकार भी स्पष्ट करना चाहिए। कपिल देव अग्रवाल ने विपक्ष के नेताओं की राजनीतिक भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव आयोग की व्यवस्था के तहत ही चुनाव लड़कर जीत हासिल करने वाले नेताओं को उसी व्यवस्था पर लगातार सवाल उठाने से पहले अपनी जवाबदेही भी तय करनी चाहिए। उनके इस बयान को भाजपा की ओर से विपक्ष के वोट चोरी अभियान के खिलाफ आक्रामक राजनीतिक जवाब के रूप में देखा जा रहा है। दरअसल, पिछले कुछ समय से राहुल गांधी और अखिलेश यादव चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का मुद्दा लगातार उठा रहे हैं। दोनों नेताओं की ओर से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए गए हैं। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है और इससे मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। अखिलेश यादव ने भी चुनावी अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए दावा किया है कि कई स्थानों पर मतदाता सूची में गड़बड़ियां सामने आई हैं। वहीं राहुल गांधी ने भी कथित वोट चोरी के मुद्दे को राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में ला दिया है। विपक्ष इस मुद्दे पर देशव्यापी आंदोलन की तैयारी में जुटा है। कपिल देव अग्रवाल के बयान का राजनीतिक संदेश साफ है कि भाजपा अब विपक्ष के आरोपों का जवाब केवल सफाई देकर नहीं, बल्कि विपक्षी नेताओं की राजनीतिक जवाबदेही पर सवाल उठाकर देना चाहती है। मंत्री के बयान ने इस बहस को नया मोड़ दे दिया है। अब सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या चुनावी व्यवस्था पर अविश्वास जताने वाले राजनीतिक दलों के लिए संसद और विधानसभा में बने रहना उचित है?
हालांकि, विपक्ष का पक्ष है कि चुनाव आयोग की जवाबदेही तय करना लोकतांत्रिक अधिकार है और चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी की शिकायतों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। वहीं भाजपा लगातार विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक हताशा और चुनावी हार से जोड़कर देख रही है। मुजफ्फरनगर की राजनीति में सक्रिय कपिल देव अग्रवाल का यह बयान ऐसे समय आया है, जब पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच राजनीतिक खींचतान तेज है। हालिया विधान परिषद चुनाव के दौरान मुजफ्फरनगर में मंत्री और सपा जिलाध्यक्ष के बीच मतदान केंद्र पर हुई नोकझोंक ने भी दोनों दलों के बीच तल्खी को उजागर किया था। फिलहाल, वोट चोरी के आरोपों पर शुरू हुई यह राजनीतिक जंग अब इस्तीफे की मांग और लोकतांत्रिक जवाबदेही तक पहुंच गई है। एक तरफ विपक्ष चुनाव आयोग को कठघरे में खड़ा कर रहा है, तो दूसरी तरफ भाजपा नेता विपक्षी नेताओं से ही जवाब मांग रहे हैं।
