नीरज प्रजापति
मुजफ्फरनगर में मौसम ने बदला करवाचौथ का रंग, सोलह शृंगार कर सुहागिनों ने मांगी पति की लंबी उम्र, कहीं बादलों से लड़ी निगाहें तो कहीं छलनी में सजे पिया के दीदार ने बनाया पल यादगार।
मुजफ्फरनगर। आसमान से बरसती बारिश की बूंदें, बादलों की ओट में छिपा चांद और हाथों में पूजा की थाली लिए अपने चांद के दीदार का इंतजार करती सुहागिनें… करवाचौथ की शाम इस बार कुछ ऐसी ही भावनाओं और प्रेम के रंगों से सराबोर नजर आई। मौसम ने जहां पर्व की रौनक के बीच इंतजार बढ़ाया, वहीं पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ महिलाओं की आस्था और समर्पण कम नहीं हुआ। दिनभर निर्जला व्रत रखने के बाद महिलाओं की निगाहें आसमान पर टिकी रहीं। हर किसी को उस पल का इंतजार था, जब चांद नजर आए और छलनी से पति का चेहरा देखकर व्रत पूर्ण किया जा सके। करवाचौथ केवल एक व्रत नहीं, बल्कि दांपत्य जीवन में प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक माना जाता है।
गुरुवार को मुजफ्फरनगर में सुबह से ही पर्व की रौनक दिखाई दी। महिलाओं ने पारंपरिक परिधानों में सजकर सोलह शृंगार किया। हाथों में मेहंदी, चूड़ियों की खनक, माथे पर बिंदिया और पूजा की सजी हुई थालियों ने पर्व के उल्लास को खास बना दिया। महिलाओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर अपने पति की दीर्घायु, अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। दिनभर भूखी-प्यासी रहकर व्रत रखने के बाद शाम होते ही चंद्र दर्शन की प्रतीक्षा शुरू हो गई। लेकिन बारिश और घने बादलों ने इस इंतजार को और भावुक बना दिया। करवाचौथ की शाम बारिश ने मौसम को ठंडा जरूर कर दिया, लेकिन पर्व का उत्साह फीका नहीं पड़ा। घरों की छतों, बालकनियों और खुले स्थानों पर महिलाएं चांद निकलने की उम्मीद में आसमान निहारती रहीं। किसी के हाथ में करवा था तो किसी की थाली में दीपक, मिठाई और पूजा की सामग्री सजी थी। इस पर्व की सबसे भावुक रस्म उस समय पूरी होती है, जब महिला छलनी से चंद्रमा के दर्शन करने के बाद उसी छलनी से अपने पति का चेहरा देखती है। इसके बाद पति के हाथों पानी पीकर व्रत खोलने की परंपरा निभाई जाती है। कई परिवारों में यह पल केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आपसी प्रेम और साथ निभाने के वादे को दोहराने का अवसर भी बनता है। बदलते समय के साथ करवाचौथ मनाने के तौर-तरीकों में बदलाव आया है, लेकिन इस पर्व से जुड़ी भावनाएं आज भी बरकरार हैं। कई दंपती अब एक-दूसरे के साथ और बेहतर जीवन की कामना करते हुए इस दिन को खास बनाते हैं।
मुजफ्फरनगर में भी बारिश के बीच पर्व का उल्लास और सुहाग की सलामती की कामना चर्चा का केंद्र बनी रही। आसमान में बादलों की आवाजाही ने चंद्र दर्शन के लिए बेचैनी जरूर बढ़ाई, मगर सुहागिनों के चेहरे पर उम्मीद बनी रही। करवाचौथ की इस शाम ने एक बार फिर दिखाया कि त्योहारों की असली खूबसूरती केवल सजावट और रस्मों में नहीं, बल्कि उन भावनाओं में छिपी होती है, जो दो लोगों को जीवनभर साथ निभाने के रिश्ते से जोड़ती हैं। मुजफ्फरनगर में इस बार करवाचौथ का संदेश साफ रहा, मौसम चाहे जितना बदल जाए, प्रेम, विश्वास और साथ निभाने का संकल्प अपनी जगह अडिग रहता है।
