सब्जी पौधशाला बनेगी समृद्धि की सीढ़ी, अनुसूचित जाति किसानों को मिला आधुनिक खेती का मंत्र

– आईआईवीआर की अनूठी पहल, मिर्च नर्सरी तकनीक से आर्थिक सशक्तिकरण की ओर बढ़े कदम

मीरजापुर, 19 जून (हि.स.)। अब सब्जी की नर्सरी सिर्फ खेत की तैयारी नहीं, बल्कि किसानों के आर्थिक भविष्य का आधार बनेगी। भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (आईआईवीआर) अदलपुरा की ओर से नवचेतना फाउंडेशन सीखड़ में आयोजित विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में यह बात सामने आई। कार्यक्रम का उद्देश्य था- अनुसूचित जाति के किसानों, महिला उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़कर उनकी आमदनी बढ़ाना और उन्हें बाजार के लिए तैयार करना।

संस्थान के निदेशक डॉ. राजेश कुमार ने किसानों से आग्रह किया कि वे संस्थान द्वारा विकसित उन्नत किस्मों को अपनाएं और पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर व्यावसायिक खेती की ओर कदम बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम सिर्फ प्रशिक्षण नहीं, सामाजिक समावेशन और न्याय की ओर एक प्रयास है।

मिर्च नर्सरी तकनीक बनी आकर्षण का केंद्र

कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहा- मिर्च की उन्नत पौधशाला उत्पादन तकनीक। डॉ. सुदर्शन मौर्य के नेतृत्व में किसानों ने बीज उपचार से लेकर प्रो-ट्रे में बुवाई तक की प्रक्रिया खुद सीखकर की। उन्हें काशी रत्ना मिर्च के बीज, पोर्ट ट्रे, कोकोपिट और वर्मीकुलाइट मुफ्त वितरित किए गए। डॉ. डीपी सिंह ने सूक्ष्मजीव आधारित बीज उपचार तकनीक की जानकारी दी, जिससे रोग प्रतिरोधक क्षमता और पौध की गुणवत्ता बेहतर होती है।

कीट व रोग नियंत्रण की नई राह

तीसरे सत्र में डॉ. आत्मानंद त्रिपाठी ने एकीकृत कीट और रोग प्रबंधन की व्यावहारिक जानकारी दी। उन्होंने कम लागत की वानस्पतिक व रासायनिक विधियों से पौधशाला को सुरक्षित रखने के उपाय बताए। उन्होंने कहा कि इस तकनीक से पर्यावरण सुरक्षित रहेगा और किसानों का खर्च भी घटेगा।

100 किसानों ने लिया प्रशिक्षण

डॉ. इन्दीवर प्रसाद के संचालन में सम्पन्न कार्यक्रम में 100 किसानों ने हिस्सा लिया। नवचेतना फाउंडेशन के डॉ. मुकेश त्रिपाठी, रामकृष्ण और रामचंद्र मौली सहित आईआईवीआर के लवकुश सतनामी और इन्द्रेश तिवारी ने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम के अंत में डॉ. त्रिपाठी ने सभी प्रतिभागियों का आभार जताते हुए उम्मीद जताई कि यह प्रशिक्षण किसानों की खेती को लाभकारी और जीवन को समृद्ध बनाएगा।

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