जोनी शर्मा

यज्ञोपवीत के आध्यात्मिक, सामाजिक और वैदिक महत्व पर हुआ विस्तार से प्रकाश; आर्य समाज ने महिलाओं को भी जनेऊ धारण का अधिकार बताया

खतौली। आर्य समाज शिवपुरी में बुधवार को वैदिक परंपरा के अनुसार दो युवकों का यज्ञोपवीत (जनेऊ) संस्कार श्रद्धा, अनुशासन और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न कराया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में आर्य समाज के पदाधिकारी, सदस्य और श्रद्धालु उपस्थित रहे। संस्कार के दौरान वैदिक रीति-रिवाजों का पालन करते हुए दोनों यजमानों को जनेऊ धारण कराया गया तथा उन्हें वैदिक जीवन मूल्यों का पालन करने का संकल्प भी दिलाया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आर्य समाज के जिला प्रधान सत्येंद्र आर्य ने यज्ञोपवीत संस्कार के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जनेऊ केवल एक धागा नहीं, बल्कि व्यक्ति के जीवन में कर्तव्य, अनुशासन और उत्तरदायित्व का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि जीवन में पहली बार जनेऊ धारण करने की प्रक्रिया को यज्ञोपवीत संस्कार कहा जाता है, जो वैदिक संस्कृति के 16 प्रमुख संस्कारों में से एक है।
उन्होंने बताया कि जनेऊ के तीन धागे देव ऋण, पितृ ऋण और ऋषि ऋण के प्रतीक माने जाते हैं। देव ऋण का अर्थ ईश्वर के प्रति कर्तव्य, पितृ ऋण का अर्थ माता-पिता के प्रति दायित्व और ऋषि ऋण का अर्थ वैदिक ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाने वाले ऋषियों के प्रति सम्मान और उत्तरदायित्व है। इन तीनों ऋणों का स्मरण कर मनुष्य अपने जीवन को धर्म, ज्ञान और सेवा के मार्ग पर अग्रसर करने का संकल्प लेता है।
सत्येंद्र आर्य ने यह भी कहा कि समाज में प्रचलित कई परंपराओं में विवाहित पुरुष छह धागों वाला जनेऊ धारण करते हैं, जिनमें तीन धागे स्वयं के और तीन पत्नी के प्रतीक माने जाते हैं। उन्होंने कहा कि आर्य समाज स्त्री और पुरुष दोनों को समान अधिकार देता है तथा महिलाओं को भी यज्ञोपवीत धारण करने की मान्यता प्रदान करता है।
इस अवसर पर वैदिक विद्वान पंडित रामदेव शास्त्री एवं अजेश आर्य ने वैदिक विधि-विधान के अनुसार राजकुमार और सागर राणा का यज्ञोपवीत संस्कार संपन्न कराया। संस्कार के दौरान दोनों यजमानों से वैदिक संकल्प भी कराया गया और उन्हें सत्य, सदाचार, स्वाध्याय तथा समाज सेवा के मार्ग पर चलने का संदेश दिया गया।
पंडित रामदेव शास्त्री ने कहा कि आर्य समाज शिवपुरी में वैदिक परंपरा के सभी 16 संस्कार विधिवत संपन्न कराए जाते हैं। जन्मोत्सव, यज्ञोपवीत संस्कार, विवाह, विवाह वर्षगांठ, पुण्यतिथि सहित अन्य पारिवारिक एवं सामाजिक अवसरों पर भी वैदिक यज्ञ और संस्कार आयोजित किए जाते हैं, जिनका उद्देश्य समाज में वैदिक संस्कृति और नैतिक मूल्यों का प्रसार करना है।
कार्यक्रम में जगदीश प्रधान, रामानंद आर्य, भगवान सिंह, शोभाराम आर्य, सुशील आर्य, चरण सिंह आर्य, डॉ. वीरेंद्र आर्य, रण सिंह आर्य, राजेंद्र खारी, दीपक आर्य, धीरेंद्र आर्य, सक्षम आर्य, अरुण आर्य, वेदांशी आर्य, देवांशी आर्य, मास्टर जयपाल सिंह, सुनील आर्य, अमरेश गुर्जर, शशि पाल, डीडी आर्य सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन वैदिक यज्ञ, आशीर्वचन और समाज में वैदिक संस्कारों के व्यापक प्रचार-प्रसार के संकल्प के साथ हुआ।

By admin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Verified by MonsterInsights