मुजफ्फरनगर । पूर्व निश्चित कार्यक्रम के अनुसार जैन समाज की धार्मिक आस्था एवं संवैधानिक अधिकारों की रक्षा हेतु जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री एवं राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग को सौंपा गया 10 सूत्रीय ज्ञापन ।
ज्ञापन में कहा गया कि जैन समाज भारत की प्राचीनतम आध्यात्मिक परंपराओं में से एक है, जिसने अहिंसा, सत्य, अनेकांतवाद और करुणा के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वर्तमान समय में जैन समाज की धार्मिक भावनाओं, संत परंपरा, तीर्थस्थलों एवं संवैधानिक अधिकारों से जुड़े अनेक विषय गंभीर चिंता का कारण बने हुए हैं। प्रतिनिधिमंडल ने विशेष रूप से पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी द्वारा दिगंबर जैन संतों की पवित्र मयूर पिच्छी को लेकर दिए गए आपत्तिजनक एवं तथ्यहीन वक्तव्य पर गहरी आपत्ति जताते हुए कहा कि इससे करोड़ों जैन श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। ज्ञापन में मांग की गई कि वे बिना किसी शर्त के सार्वजनिक रूप से जैन समाज से क्षमा मांगें तथा अपना बयान वापस लें।
ज्ञापन के माध्यम से केंद्र सरकार से जैन तीर्थस्थलों की सुरक्षा, जैन संतों के लिए विशेष सुरक्षा व्यवस्था, राष्ट्रीय एवं राज्य जैन कल्याण बोर्ड के गठन, जैन अल्पसंख्यक समाज के अधिकारों की प्रभावी सुरक्षा, राष्ट्रीय जनगणना में जैन धर्म की पृथक पहचान, प्राचीन जैन धरोहरों के संरक्षण तथा जैन धर्म एवं धार्मिक प्रतीकों के अपमान पर त्वरित एवं प्रभावी कानूनी कार्रवाई सहित 10 प्रमुख मांगों को शीघ्र लागू करने का आग्रह किया गया।
सकल जैन समाज ने आशा व्यक्त की कि केंद्र सरकार एवं संबंधित संस्थाएं जैन समाज की भावनाओं का सम्मान करते हुए इन मांगों पर सकारात्मक एवं शीघ्र निर्णय लेंगी।
जैन एकता मंच”युवा शाखा” के राष्ट्रीय अध्यक्ष गौरव जैन ने कहा कि मेनका गांधी का बयान उनकी कुमति का परिचायक है वहीं दूसरी ओर आज जैन तीर्थ स्थल व जैन सन्तो की सुरक्षा पर एक बड़ा प्रश्न खड़ा होता जा रहा है सरकारों द्वारा जैन धर्मावलंबियों की यह अनदेखी बर्दाश्त नही की जायेगी व जैन समाज अपने अधिकारों की सुरक्षा के लिये लोकतांत्रिक तरीके से हर सम्भव प्रयास करता रहेगा भले ही उसके लिये आंदोलन का रास्ता ही क्यों न अपनाना पड़े ।
प्रदीप जैन व पंकज जैन ने भी सामुहिक रूप से कहा कि मेनका गाँधी जैन सन्तो व समाज से बिना शर्त माफी मांगे अन्यथा जैन समाज के बुद्धिजीवी वर्ग से सार्वजनिक चर्चा कर हमें गलत साबित करें । रोहित जैन व डॉ अमित जैन ने भी सामूहिक रूप से समाज का पक्ष रखते हुए कहा कि जैन समाज आज अपने अधिकारों के लिये एकजुट है व संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों की रक्षा हेतू कटिबद्ध है। ज्ञापन कार्यक्रम में मुख्य रूप से गौरव जैन,रोहित जैन’अप्पू’,नितिन जैन’मोंटू’,प्रदीप जैन,पंकज जैन,विप्लव जैन,राजेश कुमार जैन,राजीव जैन,सौरभ जैन,विपिन जैन,रूपेंद्र जैन,शोभित जैन,अश्वनी जैन,आर.के.जैन,एस.के.जैन,सुधीर कुमार जैन,एन के जैन,अमित जैन,संजय जैन,सचिन जैन,अखिलेश जैन,योगेंद्र जैन,रविन्द्र जैन,मनोज जैन,अनुज जैन आदि मौजूद रहे।

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