नीरज प्रजापति
दो मासूमों सहित चार की मौत के जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग उठाई तो ग्रामीणों को मिला मुकदमा और पांच माह बाद नोटिस, एसएसपी के दरबार में पहुंचा पीड़ितों का दर्द।
मुजफ्फरनगर। थाना तितावी क्षेत्र के ग्राम हैदरनगर जलालपुर में दो मासूम बच्चों की दर्दनाक मौत के बाद इंसाफ की आवाज उठाना ग्रामीणों को भारी पड़ता नजर आ रहा है। पीड़ित परिवार और ग्रामीणों का आरोप है कि स्कूल बस ड्राइवर की कथित लापरवाही से हुई भीषण दुर्घटना में दो मासूमों की जान जाने के बाद जब उन्होंने दोषियों पर कार्रवाई और पीड़ित परिवार को सहायता दिलाने की मांग को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठाई, तो पुलिस ने कार्रवाई करने के बजाय उन्हीं ग्रामीणों के खिलाफ मुकदमे दर्ज कर दिए। इतना ही नहीं, आरोप है कि करीब पांच माह बाद नोटिस मिलने पर ग्रामीणों को मुकदमे की जानकारी हुई।
मामले से आक्रोशित दर्जनों ग्रामीण मंगलवार को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के कार्यालय पहुंचे और मांग पत्र सौंपकर पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच तथा कथित रूप से निर्दोष लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने वाले जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की। ग्रामीणों ने एसएसपी को दिए प्रार्थना पत्र में बताया कि 2 अप्रैल 2026 को गांव निवासी महिपाल, उनकी पत्नी पूनम तथा परिवार के दो मासूम बच्चों की स्कूल बस की चपेट में आने से दर्दनाक मौत हो गई थी। हादसे ने पूरे गांव को झकझोर दिया था और घटना को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त हो गया था।
ग्रामीणों के मुताबिक हादसे के बाद पीड़ित परिवार को न्याय, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और आर्थिक सहायता की मांग को लेकर टोल प्लाजा के निकट शांतिपूर्ण ढंग से धरना-प्रदर्शन किया गया था। आरोप है कि इस दौरान थाना तितावी पुलिस ने करीब 70 नामजद एवं अज्ञात ग्रामीणों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर दिया।
ग्रामीणों का कहना है कि मुकदमे की जानकारी उन्हें तत्काल नहीं दी गई और अब करीब पांच माह बाद पुलिस नोटिस तथा चार्जशीट की कार्रवाई सामने आने के बाद उन्हें पूरे प्रकरण का पता चला। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब उनका उद्देश्य दो मासूमों की मौत के मामले में न्याय की मांग करना था, तो उनके खिलाफ मुकदमा क्यों दर्ज किया गया?
एसएसपी से ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच किसी वरिष्ठ अधिकारी से कराने, निर्दोष ग्रामीणों को राहत देने तथा बिना पर्याप्त जानकारी और जांच के मुकदमा दर्ज करने के आरोपों की जांच कर संबंधित पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि पीड़ित परिवार और न्याय की मांग करने वाले ग्रामीण ही मुकदमों के घेरे में खड़े कर दिए जाएंगे, तो आम आदमी आखिर इंसाफ की आवाज किसके सामने उठाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि प्रदेश में काबिज भाजपा की योगी सरकार में मुकदमों की बरसात केवल दोषियों पर होने का दावा किया जाता है मगर यहां तो एक दम उल्टा हो रहा है पीड़ितों और पीड़ित परिवार के समर्थन में आए लोगों को ही मुकदमों के घेरे में लाकर खड़ा किया जा रहा है जबकि मुकदमों के घेरे में दोषियों को खड़ा किया जाता हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर इंसाफ मांगने के लिए खाकी का दरवाजा खटखटाना या अपराध के विरुद्ध आवाज उठाना सबसे बड़ा अपराध होता है तो फिर सजा किसको और राहत किसको मिलेगी, इस तरह तो अपराधी अपराध करके खुलेआम जिंदगी जियेंगे और पीड़ित इंसाफ मांगने के जुर्म में सलाखों की हवा खाएंगे ये कैसा कानून और कैसा इंसाफ है जो केवल लाचार और बेबसी के आग में सुलगने वालो से कोसों दूर खड़ा दिखाई दे रहा हैं और प्रदेश में काबिज भाजपा की योगी सरकार शोषित वंचित और मजलूमों की आवाज को बुलंद करने वाली सरकार होने का दावा करती है।
