मीरजापुर, 22 अक्टूबर । हलिया क्षेत्र में गोंड जनजाति के परिवारों की आजीविका मजबूत करने और स्थानीय जैव-संसाधनों के संरक्षण के लिए राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान (एनबीआरआई), लखनऊ के वैज्ञानिकों ने गुरुवार को क्षेत्रीय भ्रमण किया। इस दौरान वैज्ञानिकों ने ममरी, तेंदू, जंगली तुलसी, गाजर घास और हरद बडेरा सहित विभिन्न वनस्पतियों के नमूने एकत्र किए।
यह भ्रमण सतत जनजातीय आजीविका के लिए एकीकृत संरक्षण, कृषि-प्रौद्योगिकी एवं जैव-संसाधन उद्यम विकास परियोजना के तहत किया गया। इसका उद्देश्य स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों के वैज्ञानिक उपयोग, आधुनिक कृषि तकनीकों और जैव-संसाधन आधारित उद्यमों के माध्यम से स्वरोजगार तथा आय बढ़ाने की संभावनाओं का आकलन करना है।
वैज्ञानिकों ने क्षेत्र की प्राकृतिक परिस्थितियों, उपलब्ध वनस्पतियों और जनजातीय समुदाय की आजीविका से जुड़े पहलुओं की जानकारी ली। परियोजना के तहत स्थानीय जैव-संसाधनों के संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और कृषि में आधुनिक तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया जा रहा है। इससे जनजातीय परिवारों को आजीविका के स्थायी साधनों से जोड़ने और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करने की दिशा में संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।
भ्रमण में मुख्य वैज्ञानिक डॉ. मंजूषा श्रीवास्तव, प्रधान वैज्ञानिक डॉ. विक्रमा सिंह, पर्यावरणविद् डॉ. अनिल द्विवेदी, डॉ. अनुपमा देवी, दिवेश, तकनीशियन और सीएम फेलो गौरव सिंह सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
