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देहरादून, 09 जून । भारत सरकार के वाणिज्य मंत्रालय ने आयुष मंत्रालय और आयुष एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के सहयोग से मंगलवार काे सेलाकुई स्थित सेंटर फॉर एरोमैटिक प्लांट्स में “आयुष एवं हर्बल क्षेत्र के लिए मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) का लाभ और उत्तराखंड के लिए अवसर” विषय पर क्षेत्रीय जागरूकता कार्यक्रम और प्रेस वार्ता का आयोजन किया।

कार्यक्रम का उद्देश्य निर्यातकों, निर्माताओं, एमएसएमई, स्टार्टअप, उद्योग प्रतिनिधियों, राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरणों तथा अन्य हितधारकों को भारत के मुक्त व्यापार समझौतों, निर्यात प्रोत्साहन पहलों और वैश्विक स्तर पर बढ़ती आयुष उत्पादों की मांग से उत्पन्न अवसरों की जानकारी देना था।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आयुष मंत्रालय के संयुक्त सलाहकार देवाशीष पांडा ने कहा कि नीतिगत सुधारों, गुणवत्ता आश्वासन उपायों, नियामकीय सुदृढ़ीकरण और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों की बढ़ती स्वीकार्यता के कारण आयुष क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि निवारक स्वास्थ्य, वेलनेस और पारंपरिक चिकित्सा के प्रति वैश्विक रुचि बढ़ने से भारतीय आयुष उत्पादों और सेवाओं के लिए नए अंतरराष्ट्रीय बाजार खुल रहे हैं।

वाणिज्य विभाग के संयुक्त सचिव अमित वर्मा ने कहा कि पिछले एक दशक में सरकार ने व्यापार सुगमता, डिजिटल परिवर्तन, निर्यात प्रोत्साहन और मुक्त व्यापार समझौतों के माध्यम से बाजार पहुंच बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए हैं। उन्होंने बताया कि सरकार की निर्यात प्रोत्साहन नीति में आयुष क्षेत्र को प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में शामिल किया गया है, जिससे व्यापार, वेलनेस और रोजगार सृजन में इसकी भूमिका मजबूत हुई है।

कार्यक्रम में आयुष एवं हर्बल उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने में आयुष एक्सील की भूमिका पर भी प्रकाश डाला गया। प्रतिभागियों को बाजार संबंधी जानकारी, क्षमता निर्माण, खरीदार-विक्रेता संवाद, अंतरराष्ट्रीय संपर्क कार्यक्रमों व नियामकीय अनुपालन संबंधी सहायता की जानकारी दी गई।

चर्चा के दौरान भारत के विभिन्न व्यापार समझौतों और साझेदार देशों के साथ चल रही वार्ताओं से उत्पन्न अवसरों पर विचार-विमर्श किया गया। प्रतिभागियों को आयुष उत्पादों, औषधीय पौधों, हर्बल अर्क, न्यूट्रास्यूटिकल्स और वेलनेस सेवाओं के लिए बेहतर बाजार पहुंच, गुणवत्ता प्रमाणन और निर्यात सुविधा उपायों की संभावनाओं से अवगत कराया गया।

कार्यक्रम में सरकार द्वारा आयुष उत्पादों की गुणवत्ता, विश्वसनीयता और वैश्विक स्वीकार्यता बढ़ाने के लिए किए जा रहे प्रयासों, अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप गुणवत्ता व्यवस्था, प्रमाणन प्रणाली, डिजिटल नियामकीय तंत्र और उद्योग हितधारकों के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रमों की भी जानकारी दी गई।

औषधीय एवं सुगंधित पौधों की समृद्ध उपलब्धता और आयुष क्षेत्र में मजबूत उपस्थिति के कारण उत्तराखंड को इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण संभावनाओं वाला राज्य बताया गया। कार्यक्रम के दौरान स्थानीय हितधारकों को निर्यात अवसरों, अनुपालन आवश्यकताओं और वैश्विक बाजारों तक पहुंच से जुड़े विषयों पर विशेषज्ञों से सीधे संवाद का अवसर मिला।

संवाद सत्र में प्रतिभागियों ने निर्यात प्रक्रियाओं, गुणवत्ता मानकों, नियामकीय आवश्यकताओं और व्यापारिक अवसरों से जुड़े प्रश्न पूछे व सुझाव साझा किए। कार्यक्रम का समापन प्रेस वार्ता और हितधारक सहभागिता सत्र के साथ हुआ।

By editor

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