नई दिल्ली, 28 सितंबर । दिल्ली के राऊज एवेन्यू कोर्ट में सोमवार को 1984 सिख विरोधी दंगों से जुड़े पुलबंगश गुरुद्वारा हिंसा के आरोपित जगदीश टाइटलर के खिलाफ दर्ज मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से एक गवाह का आंशिक क्रास-एग्जामिनेशन किया गया। जगदीश टाइटलर की बेटी के आईसीयू में भर्ती होने की वजह से गवाह का क्रास-एग्जामिनेशन पूरा नहीं हो सका। स्पेशल जज रुबी नीरज कुमार ने मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को करने का आदेश दिया।
सुनवाई के दौरान जगदीश टाइटलर की ओर से पेश वकील अनिल कुमार शर्मा ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के इंस्पेक्टर ऋषिराज शर्मा से आंशिक क्रास-एग्जामिनेशन किया। जब वे क्रास-एग्जामिनेशन कर रहे थे, उसी दौरान कोर्ट को सूचित किया गया कि टाइटलर की बेटी आईसीयू में भर्ती है और डॉक्टर ने टाइटलर को तत्काल अस्पताल बुलाया है। उसके बाद कोर्ट ने इंस्पेक्टर ऋषिराज शर्मा का क्रास-एग्जामिनेशन टालते हुए आगे का क्रास-एग्जामिनेशन 12 अक्टूबर को करने का आदेश दिया।
इसके पहले 12 मई को दिल्ली पुलिस के पूर्व कमिश्नर संजय अरोड़ा का बयान दर्ज किया गया था। 12 जुलाई, 2025 को गवाह हरपाल कौर बेदी के बयान दर्ज किए गए थे। हरपाल कौर बेदी ने आरोपित जगदीश टाइटलर की कोर्ट में पहचान की थी। हरपाल कौर बेदी ने कहा था कि जगदीश टाइटलर की ओर से जान से मारने की धमकियां मिली, जिसकी शिकायत उन्होंने पुलिस से की थी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। हरपाल कौर ने घटना वाले दिन का वाकया बताते हुए कहा था कि पुलबंगश गुरुद्वारे पर जगदीश टाइटलर आया और उसने भीड़ को उकसाया। टाइटलर के उकसाने के बाद भीड़ ने गुरुद्वारा जलाया और तीन सिखों को मार डाला।
इस मामले की शिकायतकर्ता लखविंदर कौर ने अपने बयान में कहा था कि ग्रंथी सुरेंद्र सिंह ने उन्हें बताया कि उनके पति बादल सिंह की गुरुद्वारा पुलबंगश के पास भीड़ ने हत्या कर दी। जगदीश टाइटलर उस भीड़ को उकसा रहे थे और कह रहे थे कि सिखों को मार दो, उजाड़ दो, गुरुद्वारा को आग लगा दो।
सीबीआई के मुताबिक टाइटलर ने भीड़ को उकसाया था, जिसके बाद भीड़ ने पुलबंगश के गुरुद्वारे में आग लगा दी थी।
