नीरज प्रजापति

व्हाट्सऐप ग्रुप की पुरानी तकरार ने पकड़ा तूल, नई स्कॉर्पियो का शीशा टूटा, मारपीट और धमकी के आरोपों से मचा हड़कंप, पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा।

मुजफ्फरनगर। समाजवादी पार्टी के नेताओं के बीच सोशल मीडिया पर चल रही टीका-टिप्पणी और आपसी खींचतान ने मंगलवार देर रात उस समय नया मोड़ ले लिया, जब कथित विवाद सड़क तक पहुंच गया। मीनाक्षी चौक स्थित चाय की दुकान पर सपा महानगर अध्यक्ष छात्र सभा नदीम मलिक और सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष अल्पसंख्यक इसरार अल्वी आमने-सामने आ गए। देखते ही देखते दोनों के बीच कहासुनी बढ़ गई और मामला हंगामे तक जा पहुंचा। आरोप है कि विवाद के दौरान लोहे की रॉड से नदीम मलिक की नई स्कॉर्पियो का अगला शीशा तोड़ दिया गया और उनके साथ मारपीट की गई।
घटना के बाद मीनाक्षी चौक पर कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। आसपास मौजूद लोग घटनाक्रम को देखकर मौके पर जुट गए। सूचना मिलते ही खालापार पुलिस सक्रिय हुई और दोनों पक्षों को थाने ले जाकर मामले की जानकारी जुटाई।
मामला महज अचानक हुई कहासुनी का नहीं, बल्कि इसके पीछे सोशल मीडिया पर चल रही पुरानी तकरार को भी वजह बताया जा रहा है। नदीम मलिक की ओर से दी गई तहरीर के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच एक व्हाट्सऐप ग्रुप को लेकर पहले से मतभेद चल रहा था। मंगलवार रात यह मतभेद आमने-सामने की बहस में बदल गया।
तहरीर के मुताबिक, नदीम मलिक अपनी नई स्कॉर्पियो से मीनाक्षी चौक स्थित सबलू चाय की दुकान पर पहुंचे थे। उनके साथ नावेद रंगेज और चालक हसीन भी मौजूद थे। इसी दौरान वहां इसरार अल्वी अपने परिचित इरफान के साथ बातचीत कर रहे थे। दोनों की नजरें मिलीं और पुराने विवाद को लेकर बातचीत शुरू हुई। देखते ही देखते बातचीत तीखी कहासुनी में बदल गई।
बताया गया कि मौके पर मौजूद लोगों ने बीच-बचाव कर दोनों को अलग कराया। इसके बाद नदीम मलिक को उनकी स्कॉर्पियो में बैठा दिया गया। आरोप है कि जब वह वहां से निकलने की तैयारी कर रहे थे, तभी इसरार अल्वी कथित तौर पर लोहे की रॉड लेकर वापस आए। तहरीर में आरोप लगाया गया है कि उन्होंने स्कॉर्पियो के आगे का शीशा तोड़ दिया और नदीम मलिक के साथ मारपीट की। इसके साथ ही जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है।
घटना की सूचना मिलते ही खालापार पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को संभाला। पुलिस ने तहरीर के आधार पर चार धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अब पुलिस घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ रही है।

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