लखनऊ | अयोध्या में मंगलवार को एक ऐतिहासिक पल दर्ज हुआ, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रीराम मंदिर के शिखर पर भगवा ध्वज फहराकर मंदिर परिसर को नई पहचान दी। यह सिर्फ एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं बल्कि करोड़ों लोगों के उस विश्वास की जीत थी, जो पीढ़ियों से अडिग रहा है। वर्षों का संघर्ष, नारे, उम्मीदें और आस्था आखिरकार उस क्षण में पूरी होती दिखाई दीं, जब पूरा परिसर जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा।कार्यक्रम में करीब आठ हजार विशेष अतिथि मौजूद रहे। इनमें संत-साधु समाज, खेल और फिल्म जगत की हस्तियाँ, प्रमुख वीआईपी और देशभर से आए प्रतिनिधि शामिल थे।

इस कार्यक्रम की एक खास बात मुस्लिम समुदाय की मौजूदगी रही। अयोध्या के इकबाल अंसारी, डॉ. मृदुल सहित मुस्लिम समाज के कई लोगों को भी औपचारिक निमंत्रण दिया गया था। उनकी उपस्थिति ने यह संदेश दिया कि राम मंदिर अब समरसता और साझी संस्कृति का प्रतीक बन रहा है।प्रधानमंत्री मोदी के साथ आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी कार्यक्रम में शामिल हुए। ध्वज फहराने के बाद पीएम मोदी और मोहन भागवत ने श्रीरामलला की पूजा-अर्चना की। मंत्रोच्चार, शंखनाद और उत्साह से भरे माहौल ने पूरे अयोध्या को एक दिव्य उत्सव में बदल दिया।कभी संघर्ष और बदहाली का प्रतीक रही अयोध्या अब तेजी से बदलाव की राह पर है। पीएम मोदी के नेतृत्व में यह शहर सांस्कृतिक और धार्मिक पर्यटन का वैश्विक केंद्र बनता दिखाई दे रहा है। यहाँ हर दिन उत्सव जैसा माहौल है और लोगों को रामराज्य की अनुभूति का एहसास लगातार मिलता जा रहा है।इस कार्यक्रम ने एक बार फिर साबित किया कि राम मंदिर केवल एक ढांचा नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की भावना, विश्वास और एकता का केंद्र है।

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