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काठमांडू, 24 मार्च । नेपाल ने दीर्घकालिक ईंधन आपूर्ति को मजबूत करने और महंगे परिवहन पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से मोतिहारी से सर्लाही तक गैस पाइपलाइन और भंडारण सुविधा निर्माण का प्रस्ताव भारत के सामने रखा है।

नेपाल ऑयल कॉरपोरेशन (एनओसी) के अनुसार यह प्रस्ताव इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के माध्यम से भारत के पेट्रोलियम मंत्रालय को भेजा गया है। यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है, जब पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण काठमांडू घाटी में रसोई गैस की अचानक कमी देखी गई है।एनओसी ने कमी को कम करने के लिए उद्योगों को आधे भरे एलपीजी सिलेंडर आपूर्ति करने का निर्देश दिया है।

एनओसी के प्रबंध निदेशक चंडिका भट्ट ने कहा कि यह परियोजना ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और आपूर्ति प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि नेपाल को तत्काल ऐसी एलपीजी पाइपलाइन और भंडारण अवसंरचना की आवश्यकता है, जो कम से कम 30 दिनों की मांग को पूरा कर सके। भट्ट ने बताया कि घरेलू गैस बुलेट (टैंकर) की कमी के कारण नेपाल हर साल गैस परिवहन पर 6 अरब रुपये से अधिक खर्च करता है। उन्होंने कहा कि यदि पाइपलाइन और भंडारण सुविधाएं बनती हैं, तो अरबों रुपये की बचत होगी और आपूर्ति अधिक विश्वसनीय हो जाएगी।

भट्ट ने यह भी कहा कि घबराहट में की जा रही खरीदारी ने बाजार पर अतिरिक्त दबाव डाला है। उन्होंने कहा कि आयात में कोई समस्या नहीं है, लेकिन गैस लोडिंग के दौरान अधिक मांग के कारण कभी-कभी देरी हो जाती है। एनओसी ने कहा कि वितरण प्रणाली जल्द ही सामान्य होने की उम्मीद है और एक सप्ताह के भीतर पूर्ण एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति फिर से शुरू करने की योजना है।

नेपाल में हर महीने लगभग 46,000 मीट्रिक टन एलपीजी की खपत होती है और आयात भी लगभग इसी स्तर पर जारी है। हालांकि, अधिकारियों का मानना है कि पर्याप्त भंडारण अवसंरचना की कमी के कारण समय-समय पर आपूर्ति में बाधाएं आती हैं। हालांकि, सरकार ने तीन महीने तक की मांग को पूरा करने में सक्षम पेट्रोलियम अवसंरचना निर्माण की योजना की घोषणा की है, लेकिन रसोई गैस के लिए भंडारण प्रणाली अभी तक विकसित नहीं हो सकी है।

By editor

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