नई दिल्ली/मुंबई, 07 मई । वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) के सचिव एम. नागराजू ने गुरुवार को एंथ्रोपिक माइथोस एआई मॉडल से होने वाले खतरे पर प्रकाश डालते हुए बैंकिंग समुदाय से आग्रह किया कि अगर माइथोस देश में सार्वजनिक रूप से रिलीज होता है, तो उसका सामना करने के लिए तैयार रहें।
एम. नागराजू ने यहां ‘भारतीय बैंक संघ'(आईबीए) की तरफ से आयोजित जोखिम प्रबंधन सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा, “मुझे उम्मीद है कि बैंकिंग समुदाय इस स्थिति के लिए तैयार है, अगर ‘माइथोस’ देश में सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होता है।”
डीएफएस के सचिव ने बैंकों से अपनी साइबर सुरक्षा एवं परिचालन मजबूती को सुदृढ़ करने का आह्वान करते हुए कहा कि एंथ्रोपिक माइथोस जैसे उन्नत कृत्रिम मेधा (एआई) मॉडल सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होने की स्थिति में बैंकिंग प्रणाली के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकते हैं।
एम. नागराजू ने ‘एक्स’ पर जारी एक पोस्ट में लिखा कि मुंबई में ‘जोखिम प्रबंधन’ पर आयोजित पहले आईबीए शिखर सम्मेलन में मुख्य भाषण दिया। डीएफएस सचिव ने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद, भारतीय बैंकिंग क्षेत्र ने रिकॉर्ड-निम्न एनपीए स्तरों और मज़बूत ऋण वृद्धि के साथ अभूतपूर्व लचीलापन दिखाया है।
भारतीय बैंकिंग प्रणाली की संरचनात्मक मज़बूती पर प्रकाश डालते हुए डीएफएस सचिव ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) के कार्यकारी नेतृत्व की सराहना भी की, जिन्होंने व्यवस्थित तरीके से ‘गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों’ (एनपीए) को कम किया है।
वित्त मंत्रालय ने जारी एक बयान में कहा कि इस शिखर सम्मेलन में उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों में इंडियन ओवरसीज बैंक के कार्यकारी निदेशक टी. धनराज, बैंक ऑफ इंडिया के कार्यकारी निदेशक राजीव मिश्रा, पंजाब नेशनल बैंक के कार्यकारी निदेशक अमित कुमार श्रीवास्तव और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (आईआईएम) बैंगलोर के प्रोफेसर एम. जयदेव शामिल थे।
उद्घाटन सत्र में वित्तीय क्षेत्र के प्रतिष्ठित गणमान्य व्यक्तियों, नीति निर्माताओं और वरिष्ठ नेतृत्व ने भी भाग लिया।
