मनीष अग्रवाल

सहारनपुर। शाकुम्भरी विश्वविद्यालय, सहारनपुर के एमएसयू एकेडमिक फाउंडेशन के अंतर्गत संचालित अम्बिका एमएसयू इनक्यूबेशन सेंटर को उत्तर प्रदेश सरकार के स्टार्टइनयूपी कार्यक्रम के अंतर्गत इनक्यूबेटर मान्यता एवं परिचालन व्यय प्रोत्साहन की स्वीकृति मिलने के उपलक्ष्य में आज विश्वविद्यालय परिसर स्थित शैक्षणिक भवन के सेमिनार हॉल में विशेष पत्रकार वार्ता आयोजित की गई।
पत्रकार वार्ता में सहारनपुर के माननीय महापौर एवं फाउंडेशन के स्वतंत्र निदेशक डॉ. अजय कुमार, माँ शाकुम्भरी विश्वविद्यालय की माननीय कुलपति एवं फाउंडेशन की प्रबंध निदेशक प्रो. विमला वाई., विश्वविद्यालय के कुलसचिव एवं फाउंडेशन के निदेशक तथा फाउंडेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री अभिनव पुंडीर सहित विश्वविद्यालय एवं फाउंडेशन के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
पत्रकार वार्ता में अम्बिका की स्थापना से लेकर स्टार्टइनयूपी मान्यता तक की यात्रा, विकसित इनक्यूबेशन तंत्र, संस्थागत एवं औद्योगिक साझेदारियाँ, स्टार्टअप गतिविधियाँ तथा भविष्य की योजनाओं की जानकारी साझा की गई।


लोक भवन में मुख्यमंत्री के कर-कमलों से मिला मान्यता प्रमाण पत्र (लेटर ऑफ कम्फर्ट)
अम्बिका एमएसयू के मान्यता एवं प्रोत्साहन संबंधी आवेदन को 22 जून 2026 को परियोजना क्रियान्वयन इकाई की बैठक में स्वीकृति प्राप्त हुई। इसके पश्चात 27 अगस्त 2026 को लोक भवन, लखनऊ में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कर-कमलों से अम्बिका एमएसयू को लेटर ऑफ कम्फर्ट प्रदान किया गया।
इसी अवसर पर उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2026 की पुस्तिका का विमोचन एवं उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन पोर्टल का शुभारम्भ भी किया गया।
इस उपलब्धि के साथ अम्बिका एमएसयू सहारनपुर मंडल का पहला सरकारी विश्वविद्यालय आधारित स्टार्टइनयूपी मान्यता प्राप्त इनक्यूबेटर बन गया है।

एक युवा विश्वविद्यालय और एक वर्ष में बड़ी उपलब्धि

एमएसयू एकेडमिक फाउंडेशन की स्थापना जून 25 में हुई और जुलाई 25 में अभिनव पुंडीर को मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त किया गया। इसके बाद लगभग एक वर्ष के भीतर अम्बिका ने इनक्यूबेशन अवसंरचना, समर्पित टीम, विशेषज्ञ मार्गदर्शक नेटवर्क तथा स्टार्टअप सहायता तंत्र विकसित करते हुए स्टार्टइनयूपी मान्यता प्राप्त की।
इस अवधि में फाउंडेशन ने शिक्षण संस्थानों, उद्योगों, विशेषज्ञों, स्थानीय संस्थाओं एवं स्टार्टअप्स के साथ 27 सहयोग एवं समझौते किए। इनका उद्देश्य मार्गदर्शन, कौशल विकास, उद्योग संपर्क, नवाचार, उत्पाद विकास एवं बाजार तक पहुँच के अवसर उपलब्ध कराना है।
इनक्यूबेशन से बाजार तक पहुँचे स्टार्टअप अम्बिका ने अपने पहले वर्ष में स्वयं को केवल कार्यालय या कार्यस्थल तक सीमित नहीं रखा। विभिन्न प्रदर्शनियों, नवाचार एवं उद्यमिता कार्यक्रमों, अम्बिका पिचिंग कार्यक्रम, अम्बिका दीपावली महोत्सव, स्टार्टअप प्रदर्शनियों तथा नेटवर्किंग कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इसके साथ ही अम्बिका से जुड़े विभिन्न स्टार्टअप्स के उत्पाद प्रदर्शन एवं उत्पाद लॉन्च भी आयोजित किए गए, जिससे उद्यमियों को ग्राहकों, उद्योग प्रतिनिधियों और आम जनता के सामने अपने उत्पाद प्रस्तुत करने तथा बाजार से वास्तविक प्रतिक्रिया प्राप्त करने का अवसर मिला। अम्बिका का मॉडल इसलिए केवल “इनक्यूबेशन” नहीं, बल्कि “बाजार तक पहुँच” पर भी केंद्रित है।

विचार से उद्यम’ तक बनेगा मजबूत मंच

अम्बिका का इनक्यूबेशन मॉडल स्टार्टअप की यात्रा को: विचार → प्रारूप → उत्पाद → बाजार → विस्तार के रूप में देखता है।
साथ ही व्यवसाय, वित्त, कानून, अनुपालन, उद्योग, निवेश एवं तकनीक सहित विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों का मार्गदर्शक नेटवर्क तैयार किया गया है।
स्टार्टइनयूपी मान्यता से सहारनपुर के युवाओं को नए अवसर
मान्यता के बाद सहारनपुर एवं आसपास के क्षेत्रों के पात्र विद्यार्थी, नवाचारकर्ता एवं युवा उद्यमी अम्बिका के माध्यम से प्रदेश के औपचारिक स्टार्टअप तंत्र से जुड़ सकेंगे। पात्रता एवं निर्धारित शर्तों के अधीन उन्हें निर्वाह सहायता, प्रारूप-विकास सहायता, बीज पूंजी, विपणन, पेटेंट एवं बौद्धिक संपदा, विशेषज्ञ मार्गदर्शन, उद्योग एवं निवेशक संपर्क तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय आयोजनों से संबंधित अवसरों तक पहुँच मिल सकेगी।
अम्बिका का विशेष फोकस कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं मशीन लर्निंग, सूचना प्रौद्योगिकी, वित्तीय प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य एवं जैव प्रौद्योगिकी, कृषि एवं कृषि प्रौद्योगिकी, खाद्य प्रसंस्करण, शिक्षा एवं सामाजिक उद्यमिता जैसे क्षेत्रों पर है।
परिचालन व्यय प्रोत्साहन से दीर्घकालिक आधार
अम्बिका को उस समय लागू नीति व्यवस्था के अंतर्गत प्रति वर्ष अधिकतम ₹30 लाख तक के परिचालन व्यय समर्थन की पात्रता प्राप्त हुई है। निर्धारित पात्रता एवं प्रदर्शन मानकों के अधीन यह सहायता अधिकतम पाँच वर्षों अथवा आत्मनिर्भर बनने तक उपलब्ध हो सकती है, जिससे पाँच वर्षों में अधिकतम ₹1.50 करोड़ तक के परिचालन समर्थन की संभावना बनती है।
वहीं, उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2026 में मान्यता प्राप्त इनक्यूबेटरों के लिए परिचालन सहायता की सीमा बढ़ाकर ₹40 लाख प्रतिवर्ष तक की गई है।
कुलपति के नेतृत्व और महापौर के मार्गदर्शन में आगे बढ़ा अभियान
माननीय कुलपति प्रो. विमला वाई. के नेतृत्व में माँ शाकुम्भरी विश्वविद्यालय शिक्षा के साथ-साथ नवाचार, अनुसंधान, उद्यमिता एवं रोजगार सृजन को संस्थागत रूप से बढ़ावा देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। वहीं, एमएसयू अकादमिक फाउंडेशन के स्वतंत्र निदेशक एवं सहारनपुर के महापौर डॉ. अजय कुमार ने अम्बिका के विकास में महत्वपूर्ण मार्गदर्शक भूमिका निभाई है। महापौर ने कहा: “अब असली उपलब्धि सफल स्टार्टअप होंगे, सहारनपुर में प्रतिभा की कभी कमी नहीं रही। आवश्यकता एक ऐसे इकोसिस्टम की थी जो उस प्रतिभा को पहचान सके, उसे मार्गदर्शन दे सके और उसके विचार को बाजार तक पहुँचा सके। स्टार्टइनयूपी मान्यता हमारे लिए उपलब्धि से अधिक एक जिम्मेदारी है। अब हमारा लक्ष्य ऐसे सफल स्टार्टअप तैयार करना है जो निवेश आकर्षित करें, नए रोजगार पैदा करें और सहारनपुर को प्रदेश के स्टार्टअप मानचित्र पर एक मजबूत पहचान दिलाएँ।”
कुलपति महोदया ने कहा कि अम्बिका का प्रयास है कि “सहारनपुर के युवाओं को अपने विचारों को आगे बढ़ाने के लिए महानगरों की ओर जाने की आवश्यकता न पड़े, बल्कि उन्हें अपने ही क्षेत्र में विचार से उद्यम तक का मजबूत संस्थागत सहयोग मिल सके।सहारनपुर की प्रतिभा को अब केवल अवसर खोजने के लिए बाहर जाने की आवश्यकता नहीं, अवसर पैदा करने के लिए अपना मंच भी यहीं है।”

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