नीरज प्रजापति
14 साल पहले हुई मौत के मामले में 2021 में हुई ऐसी घोर लापरवाही, छह साल बाद खुली पोल
मुजफ्फरनगर। नगर पालिका परिषद मुजफ्फरनगर की कार्यप्रणाली को लेकर एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने की व्यवस्था पर ही गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला किदवई नगर निवासी खुर्शीद से जुड़ा है, जिनका निधन 9 अगस्त 2012 को हो गया था। परिजनों के अनुसार, उनके निधन के बाद परिवार की ओर से नगर पालिका में मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया पूरी की गई थी।
बताया गया कि 5 अगस्त 2021 को नगर पालिका की ओर से प्रमाण पत्र जारी किया गया, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि मृत्यु प्रमाण पत्र की जगह जन्म प्रमाण पत्र बनाकर दे दिया गया। परिवार को उस समय इस गंभीर गलती का पता नहीं चल सका और प्रमाण पत्र उनके पास ही रहा।
मामले का खुलासा तब हुआ जब परिवार की ओर से 26 अगस्त 2026 को किसी आवश्यक कार्य के लिए मृत्यु प्रमाण पत्र लगाया गया। दस्तावेज देखने पर पता चला कि जिस व्यक्ति का निधन वर्ष 2012 में हो चुका था, उसके नाम पर मृत्यु प्रमाण पत्र के स्थान पर जन्म प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया था। यह सामने आते ही परिवार के लोग नगर पालिका कार्यालय पहुंचे।
27 अगस्त 2026 को परिजन जन्म प्रमाण पत्र की फोटोस्टेट लेकर नगर पालिका पहुंचे। आरोप है कि वहां मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों ने प्रमाण पत्र को अपने कब्जे में ले लिया और इसके बाद उसी दिन नया प्रमाण पत्र जारी किया गया।
एक गलती ने व्यवस्था की पूरी कार्यप्रणाली पर खड़े किए सवाल
यह मामला महज एक प्रमाण पत्र में हुई सामान्य त्रुटि मानकर टाला नहीं जा सकता। जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र जैसे महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेजों में दर्ज जानकारी का सीधा संबंध व्यक्ति की कानूनी पहचान और परिवार के विभिन्न सरकारी कार्यों से होता है। ऐसे में मृत्यु के मामले में जन्म प्रमाण पत्र जारी होना नगर पालिका की दस्तावेजी प्रक्रिया, जांच-पड़ताल और जिम्मेदारी तय करने की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि 2021 में जारी किए गए प्रमाण पत्र की जांच किस स्तर पर हुई? आवेदन में मृत्यु की जानकारी होने के बावजूद जन्म प्रमाण पत्र कैसे तैयार हुआ? प्रमाण पत्र जारी करने से पहले संबंधित अभिलेखों और विवरणों का सत्यापन किस अधिकारी या कर्मचारी ने किया? और यदि गलती हुई थी तो उसे ठीक करने में इतने वर्षों तक मामला सामने क्यों नहीं आया?
जनता के दस्तावेजों से ऐसी लापरवाही कब तक?
इस घटना ने नगर पालिका प्रशासन की कार्यशैली को लेकर लोगों के बीच नाराजगी पैदा कर दी है। आम नागरिक सरकारी कार्यालयों में अपने जरूरी दस्तावेज बनवाने के लिए आवेदन करता है और उम्मीद करता है कि जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारी पूरी सावधानी से काम करेंगे। लेकिन यदि मृत्यु प्रमाण पत्र की जगह जन्म प्रमाण पत्र जैसा दस्तावेज जारी कर दिया जाए, तो यह केवल कागजी गलती नहीं बल्कि जनता को अनावश्यक परेशानी में डालने वाली गंभीर लापरवाही है।
अब जरूरत इस बात की है कि नगर पालिका प्रशासन इस पूरे मामले की जिम्मेदारी तय करते हुए जांच कराए और यह पता लगाए कि गलती किस स्तर पर हुई और संबंधित अधिकारी-कर्मचारी से जवाब मांगा जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि भविष्य में किसी नागरिक को अपने जरूरी सरकारी दस्तावेजों के लिए इस तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
