नीरज प्रजापति
फार्मर आईडी की अनिवार्यता में मिली राहत, अब पिछले साल की व्यवस्था से भी करा सकेंगे पंजीकरण, भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक के प्रयासों को मिली सफलता, मुख्यमंत्री का जताया आभार
मुजफ्फरनगर। धान खरीद के लिए फार्मर आईडी और एग्रीस्टैक की तकनीकी उलझनों में फंसे किसानों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। किसानों की परेशानी को लेकर भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक द्वारा उठाई गई आवाज आखिरकार शासन तक पहुंच गई। संगठन के लगातार प्रयासों और मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने धान खरीद की पंजीकरण व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए किसानों को बड़ी राहत प्रदान की है। सरकार के इस फैसले को किसान हित में एक अहम कदम माना जा रहा है।बदरअसल, खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में सरकारी क्रय केंद्रों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर धान बेचने के लिए किसानों के सामने एग्रीस्टैक और फार्मर आईडी से जुड़ी कई समस्याएं आ रही थीं। डिजिटल क्रॉप सर्वे में गलत फसल दर्ज होने, गाटा संख्या में गड़बड़ी और अन्य तकनीकी खामियों के कारण बड़ी संख्या में किसान पंजीकरण कराने में परेशानियों का सामना कर रहे थे। स्थिति यह थी कि अपनी जमीन पर धान की फसल उगाने के बावजूद कई किसान सरकारी खरीद व्यवस्था का लाभ लेने से वंचित होने की आशंका से चिंतित थे। किसानों की इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक ने 29 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर व्यवस्था में बदलाव की मांग उठाई थी। संगठन ने स्पष्ट किया था कि डिजिटल सिस्टम की तकनीकी खामियों का खामियाजा अन्नदाता को नहीं भुगतना चाहिए। इसके साथ ही मंडल स्तर पर आयोजित प्रदर्शन में भी इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाकर सरकार का ध्यान आकर्षित किया गया था।
संगठन के प्रयासों के बाद शासन के खाद्य एवं रसद अनुभाग-4 ने 4 नवंबर 2026 को शासनादेश संख्या 666/29-4-2026/ई-163/2026 जारी कर धान क्रय नीति में संशोधन किया है। नए निर्देश के अनुसार, जिन किसानों की फार्मर आईडी बन चुकी है और वे उससे संतुष्ट हैं, वे उसके आधार पर पंजीकरण करा सकते हैं। वहीं, जिन किसानों को फार्मर आईडी के विवरण में समस्या है या वे उससे संतुष्ट नहीं हैं, उन्हें पिछले वर्ष की भांति पुरानी पंजीकरण प्रक्रिया अपनाने की सुविधा दी जाएगी। इस निर्णय से उन किसानों को विशेष राहत मिलेगी, जो तकनीकी त्रुटियों के कारण सरकारी खरीद केंद्रों पर धान बेचने के लिए पंजीकरण नहीं करा पा रहे थे। अब उन्हें केवल फार्मर आईडी से जुड़ी परेशानियों के कारण सरकारी खरीद व्यवस्था से बाहर होने की चिंता नहीं रहेगी। सरकार के फैसले पर भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक ने मुख्यमंत्री को धन्यवाद एवं आभार पत्र भेजा है। संगठन ने कहा कि किसानों की व्यावहारिक समस्याओं को समझते हुए सरकार ने समय रहते सकारात्मक निर्णय लिया है। संगठन ने उम्मीद जताई कि इस बदलाव से प्रदेश के किसानों को धान बिक्री में आसानी होगी और उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ प्राप्त करने का रास्ता सुगम बनेगा। किसानों की समस्या को लेकर उठाई गई आवाज का असर अब शासन के फैसले में दिखाई दिया है।
