नीरज प्रजापति
भगत सिंह वर्मा की दो टूक चेतावनी, मांग पूरी नहीं हुई तो 2027 में भाजपा के खिलाफ वोट करेंगे किसान।
मुजफ्फरनगर। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गन्ना मूल्य को लेकर किसानों की नाराजगी अब बड़े आंदोलन की शक्ल लेने की तैयारी में है। गन्ने का लाभकारी मूल्य 700 रुपये प्रति कुंतल घोषित कराने और चीनी मिलों पर किसानों के बकाया भुगतान का मुद्दा उठाते हुए भारतीय किसान यूनियन वर्मा ने प्रदेश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने का ऐलान किया है। संगठन ने साफ कर दिया है कि यदि किसानों की मांगों को अनसुना किया गया तो आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को इसका राजनीतिक खामियाजा भुगतना पड़ेगा। महावीर चौक स्थित जिला कार्यालय पर आयोजित किसान बैठक में संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष भगत सिंह वर्मा ने कहा कि प्रदेश के गन्ना किसान लंबे समय से आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। खाद, बीज, कीटनाशक, कृषि यंत्र और मजदूरी की बढ़ती कीमतों ने खेती की लागत बढ़ा दी है, जबकि गन्ने का मूल्य किसानों की अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं बढ़ाया गया। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान परिस्थितियों में गन्ने की उत्पादन लागत 550 रुपये प्रति कुंतल से अधिक पहुंच चुकी है। ऐसे में 700 रुपये प्रति कुंतल लाभकारी मूल्य घोषित करना जरूरी है। वर्मा ने चीनी मिलों पर पिछले वर्षों के विलंबित गन्ना भुगतान का ब्याज भी किसानों को दिलाने की मांग उठाई। उनके मुताबिक प्रदेश की 121 चीनी मिलों पर करीब 19 हजार करोड़ रुपये ब्याज के रूप में बकाया हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और गन्ना मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी से इस धनराशि का तत्काल भुगतान कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार को गन्ना किसानों से जुड़े राजस्व और चीनी उद्योग से होने वाली आय का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचाना चाहिए। वर्मा ने दावा किया कि वर्ष 2025-26 में एक्साइज ड्यूटी के रूप में 60 हजार करोड़ रुपये से अधिक राजस्व प्राप्त हुआ। इसमें से 10 हजार करोड़ रुपये किसानों के बैंक खातों में सीधे भेजे जाने चाहिए। उन्होंने पंजाब सरकार का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां गन्ना किसानों को राज्य सरकार की ओर से 67.50 रुपये प्रति कुंतल की अतिरिक्त सहायता दी गई है। किसानों की आर्थिक स्थिति की तुलना करते हुए उन्होंने चौधरी चरण सिंह के मुख्यमंत्री कार्यकाल का भी उल्लेख किया। कहा कि वर्ष 1967 में गन्ने का मूल्य 12.10 रुपये से बढ़ाकर 17.10 रुपये प्रति कुंतल किया गया था, लेकिन समय के साथ अन्य वस्तुओं और खर्चों की कीमतों में जिस तेजी से वृद्धि हुई, उस अनुपात में गन्ने का मूल्य नहीं बढ़ा। उन्होंने कृषि लागत एवं मूल्य आयोग की लागत संबंधी रिपोर्ट पर भी सवाल उठाते हुए वास्तविक खेती खर्च के आधार पर मूल्य निर्धारित करने की मांग की। भगत सिंह वर्मा ने कहा कि स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप किसानों की सभी लागतों को जोड़कर उस पर 50 प्रतिशत लाभ देते हुए फसलों का मूल्य तय किया जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अब किसान केवल आश्वासनों से संतुष्ट नहीं होंगे। पंचायतों और जनजागरण के माध्यम से आंदोलन की तैयारी शुरू कर दी गई है। मांगें पूरी नहीं होने पर किसान सड़कों पर उतरकर निर्णायक संघर्ष करेंगे। बैठक की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष राकेश कुमार ने की, जबकि संचालन प्रदेश प्रवक्ता रोहित गौतम ने किया। उन्होंने भी केंद्र और प्रदेश सरकार की नीतियों को किसान विरोधी बताते हुए आंदोलन को मजबूती देने की बात कही। बैठक में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. मुर्तजा सलमानी, प्रदेश उपाध्यक्ष मोहम्मद मुखिया त्यागी, प्रदेश सचिव डॉ. परविंदर मलिक, वसीम जहीरपुर, महबूब हसन, सुरेंद्र सिंह एडवोकेट, विकास राणा, प्रदीप राणा, प्रमोद खलीफा, हाजी सुलेमान, हाजी जोगिंदर सिंह और चौधरी कालू सिंह सहित अनेक पदाधिकारी व किसान मौजूद रहे।
