नीरज प्रजापति
भाकियू राष्ट्रीय प्रवक्ता बोले थानों के आसपास रहने वाले सरकार के लोगों का पहले डाटा कलेक्ट करे पुलिस
मुजफ्फरनगर। किसान संगठनों से जुड़े नेताओं की पुलिस वेरीफिकेशन को लेकर भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने सरकार और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। किसान नेताओं के घरों पर भेजे जा रहे वेरीफिकेशन फॉर्म और उनमें मांगी जा रही व्यक्तिगत जानकारी को लेकर भाकियू में नाराजगी है। राकेश टिकैत ने आरोप लगाया कि किसान संगठनों को डराने का काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि पुलिस किसान नेताओं का डाटा एकत्र कर रही है तो सबसे पहले थानों के आसपास रहने वाले और सरकार से जुड़े लोगों का डाटा कलेक्ट किया जाना चाहिए। राकेश टिकैत ने कहा कि थानों के निकट जो सरकार के लोग हैं, पहले उनका डाटा कलेक्ट किया जाए। उन्होंने कहा कि यदि वे लोग अपनी पूरी जानकारी पुलिस को दे देते हैं तो किसान संगठन से जुड़े लोग भी अपनी जानकारी देने पर विचार करेंगे। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर किसान संगठनों से जुड़े लोगों के बारे में इतनी जानकारी क्यों जुटाई जा रही है। “हमारे वालों पर है क्या, क्या दबाना चाहती है सरकार?” टिकैत ने इस तरह के सवाल उठाते हुए पुलिस वेरीफिकेशन की मंशा पर सवाल खड़े किए। भाकियू राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा कि पुलिस की ओर से इस तरह की जानकारी जुटाने से किसान संगठनों के बीच डर का माहौल पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसान संगठन किसी दबाव में आने वाले नहीं हैं और अपने अधिकारों की आवाज उठाते रहेंगे। टिकैत ने कहा कि किसान नेताओं से उनके आपराधिक इतिहास, बैंक खातों, रोजगार और परिवार से जुड़ी जानकारी मांगी जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी व्यक्तिगत जानकारी जुटाने के पीछे सरकार का उद्देश्य क्या है।राकेश टिकैत ने दोहराया कि किसान अपना बायोडाटा लेकर थाने में नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर किसानों को अपनी जानकारी देनी होगी तो वह पंचायत के माध्यम से दी जाएगी। उन्होंने कहा कि देश में सभी के लिए संविधान एक है और कानून भी एक है। ऐसे में किसी एक वर्ग या संगठन से अलग तरीके से जानकारी जुटाने पर सवाल उठना स्वाभाविक है।राकेश टिकैत ने कहा कि देश का संविधान एक है और कानून एक है। उन्होंने सवाल किया कि यदि नियम सभी के लिए समान हैं तो किसान संगठनों से जुड़े लोगों के लिए इस तरह की अलग प्रक्रिया क्यों अपनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि किसान संगठनों के नेताओं की जानकारी लेने से पहले सरकार और उससे जुड़े लोगों की भी उसी तरह जानकारी जुटाई जानी चाहिए। यदि वहां से जानकारी उपलब्ध करा दी जाती है तो किसान संगठन भी अपनी जानकारी देने के लिए तैयार हैं।पुलिस वेरीफिकेशन फॉर्म में कथित तौर पर बैंक खातों, रोजगार, परिवार और आपराधिक इतिहास जैसी जानकारी मांगे जाने को लेकर भी भाकियू ने आपत्ति जताई है। संगठन का कहना है कि व्यक्तिगत और आर्थिक जानकारी लेने की प्रक्रिया का उद्देश्य स्पष्ट किया जाना चाहिए। राकेश टिकैत ने इसी को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर किसान नेताओं के बारे में इतनी विस्तृत जानकारी क्यों चाहिए और सरकार इसके जरिए क्या जानना या दबाना चाहती है। किसान नेताओं की पुलिस वेरीफिकेशन को लेकर भाकियू की बैठक में भी नाराजगी जताई गई। संगठन के नेताओं ने कहा कि किसान संगठनों की गतिविधियां सार्वजनिक हैं और किसान अपनी मांगों को लोकतांत्रिक तरीके से सरकार के सामने रखते हैं। बैठक में पुलिस वेरीफिकेशन की प्रक्रिया को लेकर स्पष्टता की मांग की गई और कहा गया कि यदि कोई आधिकारिक प्रक्रिया है तो उसके उद्देश्य और नियमों की जानकारी भी सार्वजनिक की जानी चाहिए। पुलिस वेरीफिकेशन को लेकर राकेश टिकैत के तीखे बयान के बाद मामला और गरमा गया है। किसान संगठन जहां इसे लेकर सवाल उठा रहे हैं, वहीं अब निगाहें पुलिस और प्रशासन के जवाब पर हैं कि किसान नेताओं का सत्यापन किस उद्देश्य से कराया जा रहा है और फॉर्म में मांगी जा रही विस्तृत जानकारी का इस्तेमाल किस प्रक्रिया के तहत किया जाएगा। फिलहाल राकेश टिकैत के बयान ने किसान नेताओं की पुलिस वेरीफिकेशन के मुद्दे को राजनीतिक और प्रशासनिक बहस के केंद्र में ला दिया है।
