नीरज प्रजापति
करीब 15 साल से जेल में बंद है मीनू त्यागी, हाईकोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद पहुंची थी सुप्रीम कोर्ट, 2022 में 16 दोषियों को सुनाई गई थी उम्रकैद की सजा
मुजफ्फरनगर। जनपद के बहुचर्चित बड़कली सामूहिक हत्याकांड में दोषी ठहराई गई कुख्यात विक्की त्यागी की पत्नी मीनू त्यागी को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई है। करीब 15 वर्षों से जेल में बंद मीनू त्यागी वर्तमान में अंबेडकरनगर जिला कारागार में निरुद्ध है। हाईकोर्ट से जमानत याचिका खारिज होने के बाद उसने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जहां सुनवाई के बाद गुरुवार को उसे जमानत प्रदान की गई। बड़कली सामूहिक हत्याकांड मुजफ्फरनगर के सबसे चर्चित और सनसनीखेज हत्याकांडों में शामिल रहा है। इस मामले में रोहाना गन्ना समिति के पूर्व चेयरमैन उदयवीर सिंह समेत उनके परिवार के आठ लोगों की हत्या कर दी गई थी। मामले की लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद वर्ष 2022 में अदालत ने मीनू त्यागी समेत कई आरोपितों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। बड़कली हत्याकांड की पृष्ठभूमि वर्ष 2005 के चरथावल ब्लॉक प्रमुख चुनाव से जुड़ी बताई जाती है। उस चुनाव में विक्की त्यागी के सामने उदयवीर सिंह चुनाव लड़े थे, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच रंजिश बढ़ती चली गई। बताया जाता है कि चुनाव के करीब एक वर्ष बाद विक्की त्यागी पर उदयवीर सिंह के मित्र और साझेदार सतीश त्यागी की हत्या का आरोप लगा। इस मामले में उदयवीर सिंह ने मुकदमे की पैरवी की थी। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच विवाद और गहरा गया।नवर्ष 2010 के ब्लॉक प्रमुख चुनाव में उदयवीर सिंह ने अपने भतीजे की पत्नी सोनिया सिंह को चुनाव जिताने में भूमिका निभाई। सीट ओबीसी के लिए आरक्षित होने के कारण विक्की त्यागी स्वयं चुनाव नहीं लड़ सका, लेकिन उसके समर्थित प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ा। इसी चुनावी और पुरानी रंजिश को बड़कली सामूहिक हत्याकांड की मुख्य पृष्ठभूमि के रूप में बताया गया। 11 जुलाई 2011 को बड़कली में सामूहिक हत्याकांड को अंजाम दिया गया था। अभियोजन के अनुसार, उदयवीर सिंह और उनके परिवार के लोगों को ट्रक से कुचलवाकर मौत के घाट उतार दिया गया था। इस वारदात में रोहाना गन्ना समिति के पूर्व चेयरमैन उदयवीर सिंह, उनके दो बेटे समरवीर और श्यामवीर, भतीजे गौरव वीर, गौरव वीर की पत्नी कल्पना, छह वर्षीय दक्ष, चार वर्षीय प्रणव और दो वर्षीय बच्चे की हत्या हुई थी। एक ही परिवार के आठ लोगों की हत्या से पूरे जिले में सनसनी फैल गई थी और यह मामला लंबे समय तक मुजफ्फरनगर में चर्चा का केंद्र बना रहा। लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद 4 जुलाई 2022 को अदालत ने मीनू त्यागी समेत 16 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। सजा पाने वालों में अनिल, ममता, शुभम, लोकेश, प्रमोद, मनोज, मोहित, धर्मेंद्र, रविंद्र, विनोद, विदित, बबलू, बोबी उर्फ विनीत शर्मा, विनीत त्यागी और हरवीर शामिल थे। मामले में एक अन्य आरोपित को नाबालिग घोषित करते हुए उसके खिलाफ अलग से सुनवाई चलाने के आदेश दिए गए थे।मीनू त्यागी 19 अगस्त 2011 से जेल में निरुद्ध बताई जा रही है। वर्तमान में वह अंबेडकरनगर जिला कारागार में बंद थी। उम्रकैद की सजा के बाद उसने जमानत के लिए हाईकोर्ट का रुख किया था, लेकिन वहां से राहत नहीं मिली। इसके बाद मीनू त्यागी की ओर से सुप्रीम कोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की गई, जिस पर सुनवाई चल रही थी। अब शीर्ष अदालत ने उसे जमानत दे दी है। इस हत्याकांड के बाद मामले के मुख्य चर्चित नामों में शामिल विक्की त्यागी की भी हत्या कर दी गई थी। न्यायालय में पेशी के दौरान विक्की त्यागी की हत्या ने पूरे प्रदेश में सनसनी फैला दी थी। बड़कली हत्याकांड और उसके बाद विक्की त्यागी की अदालत परिसर में हुई हत्या ने मुजफ्फरनगर की आपराधिक घटनाओं के इतिहास में इस मामले को बेहद चर्चित बना दिया।सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद अब मीनू त्यागी के जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हुआ है। हालांकि, जमानत की शर्तों और आवश्यक कानूनी औपचारिकताओं के पूरा होने के बाद ही उनकी रिहाई की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। करीब डेढ़ दशक पुराने इस बहुचर्चित हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब एक बार फिर बड़कली सामूहिक हत्याकांड चर्चा में आ गया है।
