महिला ने जिलाधिकारी से लगाई गुहार, बोलीं रिपोर्ट दर्ज कराकर दिलाया जाए न्याय, झूठे आरोप लगाने वालों पर हो सख्त कार्रवाई
नीरज प्रजापति
मुजफ्फरनगर। समाजवादी पार्टी से जुड़ी एक महिला द्वारा जिलाधिकारी को दिए गए प्रार्थना पत्र के बाद जिले में राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। गांव पचेंडा कला निवासी डॉ. मोनिका सिंह ने आरोप लगाया है कि उनके खिलाफ सुनियोजित तरीके से झूठी शिकायत तैयार कर उन्हें बदनाम करने तथा कानूनी कार्रवाई में फंसाने का प्रयास किया गया। उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने की मांग की है।
डॉ मोनिका सिंह ने बताया 21 जुलाई 2026 को दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री एवं समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की गिरफ्तारी के विरोध में जिले के सपा कार्यकर्ता शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। डॉ. मोनिका सिंह का कहना है कि वह भी अन्य कार्यकर्ताओं के साथ मौजूद थीं और किसी भी प्रकार से कानून-व्यवस्था भंग नहीं की गई।
बीच सड़क पर गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि प्रदर्शन के दौरान एक व्यक्ति ने कथित रूप से शराब के नशे में उनके साथ जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए अभद्रता की, गाली-गलौज की तथा जानलेवा हमला करने का प्रयास किया। मौके पर मौजूद अन्य कार्यकर्ताओं ने बीच-बचाव कर उन्हें सुरक्षित बचाया। महिला का कहना है कि इस घटना से वह मानसिक रूप से आहत हुई हैं।
उच्चाधिकारियों को पहले भी दी थी शिकायत
डॉ. मोनिका सिंह ने दावा किया है कि घटना के तुरंत बाद उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायत दी थी तथा 22 जुलाई को रजिस्ट्री के माध्यम से भी लिखित प्रार्थना पत्र भेजा। इसके बावजूद आरोपित के खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, जिससे उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद कमजोर पड़ती दिखाई दी।
अब मेरे खिलाफ ही तैयार कर दी गई झूठी रिपोर्ट
डॉ मोनिका सिंह ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि कार्रवाई न होने के बजाय उनके खिलाफ ही झूठी रिपोर्ट तैयार कर उच्चाधिकारियों को भेजी गई। उनका आरोप है कि इस रिपोर्ट के माध्यम से उन्हें झूठे मुकदमे में फंसाने और उनकी सामाजिक एवं राजनीतिक छवि धूमिल करने की कोशिश की गई है।
जिलाधिकारी से निष्पक्ष जांच और एफआईआर की मांग
डॉ. मोनिका सिंह ने जिलाधिकारी से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा जिन लोगों ने कथित रूप से झूठी रिपोर्ट तैयार कर प्रशासन को गुमराह करने का प्रयास किया है, उनके खिलाफ विधिक कार्रवाई कर रिपोर्ट दर्ज कराई जाए। उन्होंने समय रहते कार्रवाई न होने पर न्यायिक प्रक्रिया का सहारा लेने की चेतावनी दी है।
