भोपा और खतौली क्षेत्र से मिले अज्ञात शवों का पूरे विधि-विधान से किया अंतिम संस्कार

वर्षों से हजारों बेसहारा मृतकों की अंतिम यात्रा की साथी बनीं क्रांतिकारी शालू सैनी

नीरज प्रजापति 

मुजफ्फरनगर। जीवन की सबसे बड़ी सच्चाई मृत्यु है, लेकिन उससे भी अधिक पीड़ादायक वह क्षण होता है जब किसी इंसान की अंतिम यात्रा में उसे कंधा देने वाला भी कोई अपना न हो। कोई बहन नहीं, कोई बेटी नहीं, कोई बेटा नहीं और न ही कोई परिजन। ऐसे दर्दनाक क्षणों में यदि कोई अनजान व्यक्ति रिश्तों से बढ़कर अपना बन जाए, तो वह केवल समाजसेवा नहीं, बल्कि जीवित मानवता की सबसे बड़ी मिसाल बन जाती है।


ऐसी ही एक मार्मिक तस्वीर एक बार फिर मुजफ्फरनगर में देखने को मिली, जब भोपा और खतौली थाना क्षेत्र से मिले दो अज्ञात शवों की सूचना साक्षी वेलफेयर ट्रस्ट की राष्ट्रीय अध्यक्ष क्रांतिकारी शालू सैनी को मिली। सूचना मिलते ही वह मौके पर पहुंचीं। पुलिस की सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उन्होंने दोनों शवों को अपने संरक्षण में लिया और पूरे सम्मान, वैदिक मंत्रोच्चार तथा धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ उनकी अंतिम यात्रा संपन्न कराई।
उन दोनों अनजान लोगों की अर्थी पर रोने वाला कोई अपना नहीं था, लेकिन शालू सैनी ने बेटी और बहन का फर्ज निभाते हुए उन्हें सम्मानजनक विदाई दी। जिनकी पहचान तक दुनिया नहीं जान सकी, उनकी अंतिम यात्रा को भी उन्होंने सम्मान और संवेदनाओं से भर दिया।


क्रांतिकारी शालू सैनी का यह मानवीय अभियान वर्षों से लगातार जारी है। अब तक वह हजारों लावारिस, बेसहारा और अज्ञात शवों का उनके धर्म और परंपराओं के अनुसार अंतिम संस्कार करा चुकी हैं। चाहे हिंदू हो, मुस्लिम, सिख या ईसाई—हर धर्म के मृतकों को उनकी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अंतिम विदाई देकर उन्होंने यह संदेश दिया है कि इंसानियत की कोई जाति या धर्म नहीं होता।
क्रांतिकारी शालू सैनी ने कहा कि हर इंसान सम्मान के साथ इस दुनिया से विदा होने का अधिकार रखता है। यदि किसी की अंतिम यात्रा में उसका अपना कोई नहीं है, तो समाज को उसका परिवार बनना चाहिए। उनका संकल्प है कि कोई भी लावारिस या बेसहारा शव बिना सम्मान के अंतिम विदाई से वंचित न रहे।
उन्होंने बताया कि उनकी संस्था केवल लावारिस शवों का अंतिम संस्कार ही नहीं करती, बल्कि बेसहारा और परित्यक्त वृद्ध माताओं के लिए वृद्धाश्रम का संचालन, निर्धन परिवारों की बेटियों के विवाह में सहयोग, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए निःशुल्क सिलाई प्रशिक्षण, आत्मरक्षा का प्रशिक्षण, जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र और अन्य सामाजिक सहायता जैसे अनेक सेवा कार्य भी लगातार कर रही है।


इस मानवीय कार्य की जानकारी मिलने के बाद क्षेत्र के लोगों ने शालू सैनी के प्रति गहरा सम्मान व्यक्त किया। लोगों का कहना है कि आज के समय में जब कई बार अपने भी साथ छोड़ देते हैं, तब शालू सैनी उन लोगों की अंतिम उम्मीद बन जाती हैं, जिनका इस दुनिया में कोई नहीं बचता।

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