मुजफ्फरनगर। लाला जगदीश प्रसाद सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में दो दिवसीय आचार्य योग्यता संवर्धन प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंम हुआ। कार्यशाला के प्रथम दिन आगंतुक अतिथियों ने तीन सत्रों में विद्यालय विकास में शिक्षकों की भूमिका, छात्र दैनंदिनी एवं कक्षा-कक्ष प्रबंधन आदि विषयों पर चर्चा वार्ता की। कार्यशाला का शुभारंभ विद्या भारती के सदस्य चरण पाल सिंह तोमर, नचिकेता स्कूल के निदेशक अनुराग सिंघल, पूर्व प्रधानाचार्य कौशल आर्य एवं विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ अखिलेश कुमार शर्मा ने मां शारदे के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया। प्रधानाचार्य डॉ अखिलेश कुमार शर्मा ने सभी अतिथियों को तिलक लगाकर एवं अंगवस्त्र भेंटकर सम्मानित किया।

प्रथम सत्र में मुख्य वक्ता चरण पाल सिंह तोमर ने विद्यालय विकास में शिक्षकों की भूमिका विषय में विस्तार से जानकारी दी। सर्वप्रथम उन्होंने विद्या भारती की स्थापना, संरचना व लक्ष्य के विषय में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि शिक्षा के क्षेत्र में भारत विश्व गुरु रहा है। संस्कार के बिना शिक्षा शून्य होती है।आदर्श विद्यालय के निर्माण में प्रबंध तंत्र, प्रधानाचार्य, शिक्षक तथा छात्रों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने विद्यालय विकास में शिक्षकों के योगदान के प्रमुख बिंदुओं का भी समझाया। उन्होंने शिक्षा में नवाचार, क्रिया शोध, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सुरक्षित वातावरण, शैक्षिणिक उत्कृष्टता, भावनात्मक व मनोवैज्ञानिक संपर्क, चरित्र निर्माण व संस्कार, अनुशासन व नैतिक मूल्यों का निर्माण आदि के बिंदुओं को विस्तार से समझाया। अंत में उन्होंने कहा कि जो भी कार्य करें, उसे पूरे मनोयोग एवं समर्पण के भाव के साथ पूर्ण करें, तभी विद्यालय विकास में हमारी भूमिका की संकल्पना साकार हो सकेगी।

द्वितीय सत्र में सरस्वती शिशु एवं विद्या मंदिर इंटर केशवपुरी के पूर्व प्रधानाचार्य कौशल आर्य ने छात्र दैनंदिनी के महत्व के विषय में शिक्षकों को बहुमूल्य जानकारी दी। उन्होंने कहा कि छात्र दैनंदिनी विद्यालय का दर्पण होती है। यह अभिभावक-शिक्षक संवाद, होमवर्क ट्रैकिंग तथा बेहतर अनुशासन के लिए बहुत उपयोगी होती है।

तृतीय सत्र में मुख्य वक्ता अनुराग सिंघल ने कक्षा-कक्ष प्रबंधन विषय पर महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने बताया कि समय के अनुसार बदलाव अनिवार्य होता है। अपने विषय को रुचिकर बनाने का प्रयास करें। उन्होंने कक्षा के समस्त छात्रों से भावनात्मक रूप से जुड़ने तथा छात्रों के विभिन्न कौशल को समझने का भी सुझाव दिया।

अंत में विद्यालय प्रधानाचार्य डॉ अखिलेश कुमार शर्मा ने आगंतुक अतिथियों का आभार प्रकट करते हुए कहा कि कार्यशाला में बताई गई जानकारी को अपने शिक्षण में अवश्य शामिल करें। उन्होंने कहा कि जो भी कार्य करें, उसे पूरे मनोयोग एवं समर्पण के भाव के साथ पूर्ण करें, तभी विद्यालय विकास में हमारी भूमिका की संकल्पना साकार हो सकेगी।

कार्यक्रम का संचालन महेश कुमार ने किया। इस अवसर पर विद्यालय के समस्त शिक्षकगण उपस्थित रहे। समापन कल्याण मन्त्र के साथ हुआ।

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