नई दिल्ली, 14 अगस्त । दिल्ली के राऊज एवेन्यू कोर्ट ने दवा घोटाला मामले में दिल्ली के स्वास्थ्य सेवाओं के पूर्व महानिदेशक डॉ. वत्सल अग्रवाल और डॉ. विनोद कुमार रंगा की जमानत याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। स्पेशल जज विद्या प्रकाश ने जमानत याचिकाओं पर 17 अगस्त को फैसला सुनाने का आदेश दिया।
एंटी करप्शन ब्रांच ने दोनों को दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की खरीद में करीब सात सौ करोड़ रुपये की गड़बड़ी करने के मामले में गिरफ्तार किया था। सुनवाई के दौरान डॉ. वत्सला अग्रवाल की ओर से पेश वरिष्ठ वकील रमेश गुप्ता ने कहा कि वो पिछले 40 दिनों से जेल में हैं। उन्हें स्वास्थ्य की समस्याएं हैं, जिसका जिक्र हिरासत के आदेश में भी किया गया है। रमेश गुप्ता ने कहा कि वत्सला अग्रवाल को बलि का बकरा बनाया गया है, ताकि कुछ उच्च पदस्थ लोगों को बचाया जा सके। उन्होंने कहा कि वत्सला अग्रवाल के घर से कुछ भी बरामद नहीं हुआ है।
आरोपित डॉ विनोद कुमार रंगा की ओर से पेश वकील विजय बिश्नोई ने कहा कि याचिकाकर्ता 54 दिनों से हिरासत में है। उन्होंने कहा कि अगर जांच एजेंसी जांच के लिए और समय लेना चाहती है, तो याचिकाकर्ता को अंतरिम जमानत दी जानी चाहिए। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि वो याचिकाकर्ता को अंतरिम जमानत पर रिहा नहीं करना चाहती है।
इस मामले में एंटी करप्शन ब्रांच ने सतर्कता निदेशालय की शिकायत पर 2 जून को एफआईआर दर्ज की थी। एफआईआर में दवाओं, सर्जिकल सामग्री और चिकित्सा उपकरणों की खरीद में करीब सात सौ करोड़ रुपये की हेराफेरी का आरोप लगाया गया है। एफआईआर में कहा गया है कि दिल्ली के स्वास्थ्य सेवाओं के माहानिदेशालय और दिल्ली सरकार के सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी ने इस हेराफेरी को अंजाम दिया।
