नई दिल्ली, 07 अप्रैल । दिल्ली उच्च न्यायालय ने दूध और मांस देने वाले पशुओं को मांस और हड्डी युक्त खाना देने पर रोक लगाने के फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) के नोटिफिकेशन को निरस्त कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि एफएसएसएआई को जानवरों को भोजन देने को लेकर दिशा-निर्देश जारी करने को कोई अधिकार नहीं है।
उच्च न्यायालय ने कहा कि एफएसएसएआई को केवल मनुष्य़ों के लिए खाने की चीजों पर कोई भी दिशा-निर्देश जारी करने का अधिकार है। उच्च न्यायालय ने कहा कि धारा 16 के तहत एफएसएसएआई को केवल मनुष्यों के खाने को लेकर ही अधिकार हैं और इसमें जानवरों या जानवरों के खाने को लेकर कोई भी फैसला करने का अधिकार नहीं है।
दरअसल, उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स के नोट सी को चुनौती दी गई है। इस नोट में कहा गया है कि मुर्गा, सूअर और मछली छोड़कर दूध या मांस देने वाले जानवरों के लिए जो भोजन तैयार किया जाता है उसमें मांस, हड्डी या आंतरिक अंगों, गाय या सुअर के उत्तकों का इस्तेमाल करने पर रोक लगाया गई है।
याचिका गोदरेज एग्रोवेट नामक कंपनी ने दायर की थी। याचिकाकर्ता कंपनी जानवरों के फीड (भोजन) तैयार कर उन्हें बेचती है। याचिका में कहा गया था कि एफएसएसएआई ने अपने अधिकार क्षेत्रों का उल्लंघन कर इस नोट को जारी किया है। याचिका में कहा गया था कि एफएसएसएआई को मनुष्यों के खाने से जुड़ी वस्तुओं को नियंत्रित करने का अधिकार है न कि जानवरों के खाने से जुड़ी वस्तुओं को। याचिका में जानवरों के फीड को बीआईएस प्रमाणन जरुरी करने के आदेश को भी चुनौती दी गई थी क्योंकि ऐसा आदेश केंद्र सरकार दूसरे कानून के तहत दे सकती है और इसमें एफएसएसएआई को कोई अधिकार नहीं है।
