फुगाना की चीख ने रुला दिया हर दिल, पांच जिंदगियां एक पल में मलबे में दफन, सामाजिक संगठनों ने सरकार से पीड़ित परिवार को हर संभव सहायता देने की उठाई मांग
नीरज प्रजापति
बुढ़ाना (मुजफ्फरनगर)। फुगाना गांव में रविवार देर रात हुआ दर्दनाक हादसा पूरे जनपद की आंखें नम कर गया। एक जर्जर कच्चा मकान अचानक भरभराकर ढह गया और देखते ही देखते एक ही परिवार की खुशियां मलबे में दफन हो गईं। इस हृदय विदारक हादसे में मकान मालिक सहित चार मासूम बच्चों की दर्दनाक मौत ने पूरे क्षेत्र को गहरे शोक में डुबो दिया। गांव की गलियों में पसरा सन्नाटा, परिजनों की चीख-पुकार और हर आंख से छलकते आंसू इस त्रासदी की भयावहता को बयां कर रहे हैं।
घटना के बाद हर किसी की जुबान पर बस एक ही दुआ थी कि शायद मलबे के नीचे दबे लोगों में किसी की सांसें चल रही हों, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। राहत और बचाव कार्य के बीच जब एक-एक कर शव बाहर निकाले गए तो वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। एक ही परिवार के चार मासूम बच्चों और उनके पिता की मौत ने पूरे जनपद को झकझोर कर रख दिया।

इस हृदय विदारक हादसे पर गोरख सेवा समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष रविंद्र नायक ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखा। उन्होंने कहा कि यह केवल एक परिवार का नहीं बल्कि पूरे समाज का अपूरणीय नुकसान है। उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की कि पीड़ित परिवार के जीवित बचे सदस्यों को पर्याप्त आर्थिक सहायता, सुरक्षित आवास और हरसंभव सरकारी मदद तत्काल उपलब्ध कराई जाए, ताकि वे इस असहनीय दुख से उबर सकें। साथ ही उन्होंने प्रशासन से जर्जर और कच्चे मकानों का सर्वे कर समय रहते आवश्यक कार्रवाई करने की भी मांग की, जिससे भविष्य में कोई और परिवार ऐसी त्रासदी का शिकार न बने।

वहीं शिव सेना के जिलाध्यक्ष बिट्टू सिखेड़ा ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि फुगाना की यह त्रासदी पूरे जनपद के लिए एक चेतावनी है। उन्होंने कहा कि मासूम बच्चों की असमय मौत ने हर संवेदनशील व्यक्ति का दिल झकझोर दिया है। उन्होंने सरकार और प्रशासन से पीड़ित परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता, पुनर्वास और हरसंभव सहयोग उपलब्ध कराने की मांग करते हुए कहा कि ऐसे जर्जर मकानों की पहचान कर समय रहते उचित व्यवस्था की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी परिवार की खुशियां इस तरह मलबे में न बदलें।

लावारिसों की वारिस के नाम से विख्यात समाजसेविका क्रांतिकारी शालू सैनी ने भी इस हादसे पर गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जब चार मासूम बच्चों की अर्थियां एक साथ उठती हैं तो केवल एक परिवार नहीं, बल्कि पूरी इंसानियत रो पड़ती है। उन्होंने कहा कि यह दर्द शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। शालू सैनी ने प्रदेश सरकार से पीड़ित परिवार के पुनर्वास, आर्थिक सहायता और हरसंभव मदद की मांग करते हुए कहा कि समाज के सक्षम लोगों को भी ऐसे दुख की घड़ी में आगे आकर पीड़ित परिवार का सहारा बनना चाहिए। उन्होंने दिवंगत आत्माओं की शांति और शोकाकुल परिवार को इस असीम दुख को सहने की शक्ति देने की ईश्वर से प्रार्थना की। उन्होने कहा कि फुगाना की यह दर्दनाक घटना लंबे समय तक लोगों के जेहन में रहेगी। एक पल में उजड़ा यह परिवार पूरे समाज को यह सोचने पर मजबूर कर गया है कि जर्जर मकानों में रहने वाले गरीब परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना केवल प्रशासन ही नहीं, बल्कि समाज की भी साझा जिम्मेदारी है।
