वक्फ अधिनियम के खिलाफ प्रदर्शन में हिंदू परिवारों पर हुई हिंसा के कारण कई पीड़ित मुर्शिदाबाद से पलायन कर रहे हैं। कुछ पीड़ित डीजीपी से मिलने बुधवार को कोलकाता पहुंचे।

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सुकांता मजूमदार ने भाजपा मुख्यालय में पीड़ितों से मुलाकात की और फिर वे प्रदेश महासचिव जगन्नाथ चटर्जी और वरिष्ठ नेता तापस रॉय के साथ मुर्शिदाबाद के शमशेरगंज, जाफराबाद से आए पीड़ितों के साथ पश्चिम बंगाल पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) से मिलने भवानी भवन पहुंचे।

डीजीपी से मिलने पहुंची हिंसा की दंश झेल झुकी एक पीड़ित महिला ने पत्रकारों को बताया, “हम लोग घर नहीं जाएंगे, मुस्लिम लोग हमें जीने नहीं देंगे। वे गले में चाकू लगा देते हैं। उनके पास कई प्रकार के हथियार हैं। वे हिंदू की लड़कियों के हाथ और बाल पकड़ कर खींचते है। 

वो ऐसा क्यों करते हैं, इसमें हमारा क्या दोष है? मुस्लिम लड़के हिंदू लड़कियों को देख कर सिटी बजाते हैं, छेड़ते हैं। जब तक बीएसएफ नहीं आएगी, हम वापस वहां नहीं जाएंगे। अपनी जान के लिए हम डीजीपी से मुलाकात करने आए हैं।”

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुकांता मजूमदार ने पत्रकारों से कहा, मालदा के वैष्णव नगर विधानसभा क्षेत्र में बने रिफ्यूजी कैंप में पिछले तीन दिनों से पीड़ित रह रहे हैं। उसमें से आठ पीड़ित और एक बच्चा कोलकाता आए, ताकी पूरे पश्चिम बंगाल के लोगों को बता सकें कि उस दिन मुर्शिदाबाद में क्या हुआ था।

उन्होंने आगे कहा, कोलकाता के जो इंटेलेक्चुअल और पढ़े-लिखे लोग हैं, उन्हें शायद पूरा विषय पता नहीं है। पीड़ित अपनी आपबीती बताने के आए हैं। उनके घर लूट लिए गए, उन्हें मारा-पीटा गया, इज्जत लूटने की कोशिश की गई। किसी तरीके से सेंट्रल फोर्स की मदद से वे लोग वहां से भाग पाए।

दो लोगों का मर्डर कर दिया गया, हरगोविंद दास और चंदन दास की हत्या कर दी गई। आज ऐसी स्थिति में हम डीजीपी से मिलने आए हैं, क्योंकि सीएम ममता बनर्जी तो मिलती ही नहीं हैं।

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