नीरज प्रजापति
व्यापारिक लेन-देन से लेकर 28 लाख रुपये की कथित बकाया राशि तक उठाए सवाल, प्रतिष्ठान पर धमकी के आरोपों की भी साक्ष्यों के आधार पर जांच कराने की अपील।
मुजफ्फरनगर। व्यापारिक जगत में लेन-देन को लेकर उठे विवाद के बीच शुभम मित्तल ने अपने विरुद्ध लगाए गए आरोपों पर खुलकर पक्ष रखते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। उन्होंने सवाल किया कि जब व्यापारिक विवाद में बिल, बहीखाते, बैंक स्टेटमेंट और अन्य दस्तावेज उपलब्ध हो सकते हैं, तो वास्तविक स्थिति सामने लाने के लिए इनका निष्पक्ष मिलान क्यों न कराया जाए? शुभम मित्तल ने मंडी समिति से संबंधित लगभग 28 लाख रुपये की कथित बकाया राशि, विभिन्न फर्मों के बीच हुए लेन-देन और उनके प्रतिष्ठान पर धमकी दिए जाने से जुड़े आरोपों की जांच को इस प्रकरण के अहम पहलू बताया। उन्होंने पुलिस प्रशासन से मांग की कि किसी भी पक्ष के दावे को अंतिम सत्य मानने के बजाय सभी तथ्यों की पड़ताल कर वास्तविकता सामने लाई जाए। शुक्रवार को व्यापारी शुभम मित्तल द्वारा मीडिया सेंटर के पत्रकारों के साथ नई मंडी स्थित होटल गोल्डन ईरा में पत्रकार वार्ता का आयोजन किया गया। इस दौरान शुभम मित्तल ने दि गुड़ खांडसारी ग्रेन मर्चेंट एसोसिएशन के मंत्री अंकित गर्ग उर्फ निशांक गर्ग तथा अन्य पदाधिकारियों की ओर से लगाए गए आरोपों के संबंध में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि व्यापारिक मामलों में किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा दांव पर लगने से पहले निष्पक्ष जांच जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिवम सिंघल, तपन सिंघल और अन्य लोगों के माध्यम से उन पर अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। उनका कहना है कि पूरे प्रकरण को एकतरफा दृष्टिकोण से देखने के बजाय सभी संबंधित पक्षों के बयान और उपलब्ध साक्ष्य सामने रखे जाने चाहिए।
खातों के मिलान से खुलेगा लेन-देन का पूरा हिसाब
व्यापारिक लेन-देन के संबंध में शुभम मित्तल ने संबंधित फर्मों के बिल, खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड, बहीखाते, बैंक स्टेटमेंट और भुगतान की रसीदों का मिलान कराने की मांग की। उन्होंने दावा किया है कि दस्तावेजों की जांच से भुगतान, देनदारी और व्यापारिक हिसाब-किताब की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है। उन्होंने कहा कि किसी भी विवाद में केवल आरोपों के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय प्रमाणित रिकॉर्ड को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। मंडी समिति से संबंधित लगभग 28 लाख रुपये की कथित बकाया राशि को लेकर भी शुभम मित्तल ने आधिकारिक अभिलेखों की जांच कराने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि संबंधित विभाग के प्रमाणित रिकॉर्ड से यह स्पष्ट होना चाहिए कि बकाया राशि के संबंध में वास्तविक स्थिति क्या है। इस मुद्दे पर किसी भी निष्कर्ष से पहले दस्तावेजों का सत्यापन जरूरी है। शुभम मित्तल ने प्रतिष्ठान पर पहुंचकर धमकी देने और हथियारबंद व्यक्तियों के साथ आने से जुड़े आरोपों को बेबुनियादी और तथ्यहीन बताते हुए जांच की मांग कर उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज, गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्यों की जांच पड़ताल करने की मांग की। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से पुलिस प्रशासन से पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच करने तथा सभी संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर देने की अपील की। शुभम मित्तल ने कहा कि वह कानून का सम्मान करते हैं और जांच में पूरा सहयोग करने के लिए तैयार हैं। शुभम मित्तल ने कहा है कि व्यापारिक विवादों का समाधान दबाव या आरोप-प्रत्यारोप से नहीं, बल्कि पारदर्शिता, संवाद और प्रमाणित तथ्यों से होना चाहिए। उन्होंने दोहराया कि उनका उद्देश्य किसी की छवि खराब करना नहीं, बल्कि अपने पक्ष के तथ्यों को सामने लाना है।
