नीरज प्रजापति
खेत में मिली थी किसान की लाश, गवाहों के मुकरने और अहम साक्ष्य न मिलने से कमजोर पड़ा अभियोजन पक्ष का मामला।
मुजफ्फरनगर। करीब दस साल से न्यायालय में चल रहे किसान हत्याकांड के मामले में अदालत ने चार आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। थानाभवन क्षेत्र के मारुखेड़ी गांव में किसान गौतम सिंह की हत्या से जुड़े इस मामले में अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका। चश्मदीद गवाहों के अभाव, गवाहों के अपने पुराने बयानों से पीछे हटने और महत्वपूर्ण बरामदगी नहीं होने के चलते आरोप साबित नहीं हो सके।
अपर जिला एवं सत्र न्यायालय ने मामले की सुनवाई के बाद हसरत, इस्माईल, इरफान उर्फ हीरो और खलील निवासी गांव बुंटा, थाना गढ़ीपुख्ता को दोषमुक्त करने का फैसला सुनाया। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के विरुद्ध आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं रहा।
खेत की सिंचाई करने गए किसान की अगली सुबह मिली थी लाश
मामले के अनुसार, 21 जनवरी 2014 को थानाभवन थाने में किसान गौतम सिंह की हत्या के संबंध में मुकदमा दर्ज कराया गया था। गौतम सिंह रात में फसल की सिंचाई करने के लिए खेत पर गए थे। अगली सुबह उनका शव खेत में संदिग्ध परिस्थितियों में पड़ा मिला। शुरुआती दौर में पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ जांच शुरू की थी। बाद में जांच के दौरान कुछ लोगों को आरोपी बनाकर जेल भेजा गया।
चश्मदीद नहीं, परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर टिकी थी जांच
मुकदमे की सुनवाई के दौरान सामने आया कि घटना का कोई प्रत्यक्षदर्शी गवाह नहीं था और अभियोजन का मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित था। पुलिस हिरासत में दिए गए एक आरोपी के बयान के आधार पर अन्य लोगों के नाम सामने आए थे, लेकिन अदालत में ऐसे बयान को आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं माना गया। संबंधित आरोपी अंकित की मुकदमे की सुनवाई के दौरान मृत्यु भी हो गई थी।
गवाही और बरामदगी ने कमजोर की अभियोजन की दलील
मामले में वादी विजयपाल सिंह और मृतक के भतीजे अमरनाथ ने अदालत में पुलिस को दिए गए अपने पुराने बयानों का समर्थन नहीं किया। दोनों ने कहा कि उन्हें नहीं मालूम कि गौतम सिंह की हत्या किसने की थी। इसके अलावा हत्या में इस्तेमाल किए जाने का आरोपित डंडा और खेत से चोरी हुई मोटर भी बरामद नहीं हो सकी।
इन परिस्थितियों में अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित नहीं कर पाया। अदालत के फैसले के साथ ही इस मामले में नामजद चारों आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया गया। यह फैसला आपराधिक मुकदमों में आरोपों को साबित करने के लिए विश्वसनीय गवाहों और ठोस साक्ष्यों की अहमियत को रेखांकित करता है।
