नीरज प्रजापति
महाअष्टमी और महानवमी के दुर्लभ संयोग पर घरों से मंदिरों तक रही भक्ति की धूम, हवन में आहुतियां देकर सुख-समृद्धि की कामना; कन्याओं को भोजन कराकर श्रद्धालुओं ने खोले नौ दिनों के व्रत।
मुजफ्फरनगर। नौ दिनों की साधना, मां भगवती की आराधना और अटूट आस्था के बाद सोमवार को जनपद में शारदीय नवरात्र का समापन धार्मिक उल्लास के बीच हुआ। घरों से लेकर मंदिरों तक पूजा-पाठ, हवन और कन्या पूजन की धूम रही। कहीं वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यज्ञ कुंड में आहुतियां अर्पित की गईं, तो कहीं छोटी कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनका पूजन किया गया। मां दुर्गा के जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालुओं ने परिवार की खुशहाली, आरोग्य और समाज में सुख-शांति की कामना के साथ नौ दिनों की उपासना को पूर्णता प्रदान की। इस बार महाअष्टमी और महानवमी का संयोग एक ही दिन पड़ने से सोमवार का धार्मिक महत्व और बढ़ गया। सुबह से ही श्रद्धालु पूजा-अर्चना की तैयारियों में जुट गए। घरों में पूजा स्थलों को सजाकर मां भगवती की विधि-विधान से आराधना की गई। इसके बाद हवन कर मंत्रोच्चार के बीच आहुतियां दी गईं। श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा से परिवार में सुख-समृद्धि, जीवन में सकारात्मकता और समाज में शांति बनाए रखने की प्रार्थना की। नवरात्र के समापन पर कन्या पूजन प्रमुख धार्मिक परंपरा के रूप में सामने आया। श्रद्धालुओं ने छोटी कन्याओं को आमंत्रित कर उनके चरण धोए, तिलक लगाया और श्रद्धापूर्वक भोजन कराया। पारंपरिक रूप से पूड़ी, हलवा और चने का प्रसाद परोसा गया। भोजन के बाद कन्याओं को दक्षिणा और उपहार भेंट किए गए तथा उनके आशीर्वाद के साथ व्रत का पारण किया गया। कन्या पूजन के माध्यम से श्रद्धालुओं ने नारी शक्ति के प्रति सम्मान और मां दुर्गा के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की। घरों में सुबह से ही कन्याओं को आमंत्रित करने और प्रसाद तैयार करने की चहल-पहल दिखाई दी। नौ दिनों तक व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह अवसर धार्मिक साधना की पूर्णता का प्रतीक बना।
महागौरी और सिद्धिदात्री की आराधना का विशेष महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महाअष्टमी पर मां महागौरी और महानवमी पर मां सिद्धिदात्री की पूजा का विशेष महत्व है। मां महागौरी को शांति और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है, जबकि मां सिद्धिदात्री की आराधना मनोकामनाओं की पूर्ति और आध्यात्मिक उन्नति की कामना से की जाती है। दोनों तिथियों के संयोग के चलते श्रद्धालुओं ने परंपराओं के अनुसार पूजा-अर्चना की।
हवन की आहुतियों के साथ मां से मांगा सुख-शांति का आशीर्वाद
नवरात्र के अंतिम दिन धार्मिक अनुष्ठानों के बीच श्रद्धालुओं ने देश और समाज की खुशहाली की कामना की। हवन, पूजन और कन्या भोज के साथ घरों में नौ दिनों तक चलने वाली साधना संपन्न हुई। भक्ति और श्रद्धा से सराबोर माहौल में श्रद्धालुओं ने मां भगवती के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए शक्ति पर्व को भावपूर्ण विदाई दी।
