नीरज प्रजापति

‘गलत को सहना नहीं, आवाज उठाना है’, सुरक्षित-असुरक्षित स्पर्श, साइबर अपराध और कानूनी अधिकारों पर विद्यार्थियों को किया जागरूक।

मुजफ्फरनगर। बच्चों की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता। उनके अधिकारों की जानकारी और किसी भी अप्रिय परिस्थिति में तत्काल आवाज उठाने की क्षमता ही उन्हें सुरक्षित रखने की सबसे बड़ी ताकत है। इसी उद्देश्य को लेकर गांधी जयंती के अवसर पर माउंट लिट्रा ज़ी स्कूल, मुजफ्फरनगर में बच्चों के बीच जागरूकता की ऐसी अलख जगाई गई, जिसमें पॉक्सो अधिनियम-2012 से लेकर सुरक्षित-असुरक्षित स्पर्श और साइबर सुरक्षा तक कई महत्वपूर्ण विषयों पर खुलकर जानकारी दी गई।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, मुजफ्फरनगर के तत्वावधान में आयोजित विशेष जागरूकता एवं संवेदीकरण कार्यक्रम में विद्यार्थियों को बताया गया कि किसी भी प्रकार के शोषण, उत्पीड़न या अनुचित व्यवहार की स्थिति में चुप रहना समाधान नहीं है। बच्चों को अपने अधिकार पहचानने, खतरे को समझने और जरूरत पड़ने पर भरोसेमंद व्यक्ति अथवा संबंधित प्राधिकरण तक अपनी बात पहुंचाने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम में अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट वरुणा वशिष्ठ, सहायक लीगल एंड डिफेंस काउंसिल नाहिद परवीन, बाल कल्याण समिति की सदस्य पिंकी रानी तथा पी.एल.बी. धनीराम ने विद्यार्थियों से संवाद किया। वक्ताओं ने पॉक्सो अधिनियम के प्रमुख प्रावधानों की जानकारी देते हुए समझाया कि बच्चों की सुरक्षा के लिए कानून में विशेष संरक्षण की व्यवस्था की गई है।
कार्यक्रम में सुरक्षित और असुरक्षित स्पर्श का मुद्दा विशेष रूप से चर्चा में रहा। विद्यार्थियों को समझाया गया कि उन्हें अपने शरीर और व्यक्तिगत सीमाओं के प्रति जागरूक रहना चाहिए। यदि कोई व्यवहार उन्हें असहज करता है या उन्हें किसी प्रकार का खतरा महसूस होता है तो उसे नजरअंदाज करने के बजाय तत्काल माता-पिता, शिक्षक अथवा किसी विश्वसनीय व्यक्ति को इसकी जानकारी देनी चाहिए।
बदलते डिजिटल दौर में बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। साइबर माध्यमों के बढ़ते इस्तेमाल के बीच विद्यार्थियों को निजी जानकारी, फोटो, पासवर्ड और अन्य संवेदनशील सामग्री साझा करने से बचने तथा संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधियों के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी गई। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि डिजिटल दुनिया में लापरवाही कई बार गंभीर समस्या का कारण बन सकती है, इसलिए जागरूकता और सावधानी बेहद जरूरी है।
वक्ताओं ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा सिर्फ बच्चे की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि परिवार, विद्यालय और पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है। बच्चों को ऐसा वातावरण मिलना चाहिए, जहां वे किसी भी परेशानी को बिना डर और संकोच के सामने रख सकें। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने अधिकारों को जानने के साथ-साथ दूसरों के अधिकारों और सम्मान का भी ध्यान रखने का आह्वान किया।
विद्यालय की निर्देशिका चारु भारद्वाज एवं प्रधानाचार्य डॉ. के. जी. अरोड़ा ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिकारियों और अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि बच्चों को किताबों की शिक्षा के साथ जीवन की वास्तविक चुनौतियों से निपटने की जानकारी देना भी बेहद जरूरी है। ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को जागरूक, आत्मविश्वासी और जिम्मेदार नागरिक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के विद्यार्थियों और शिक्षकों की सक्रिय सहभागिता रही।

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