जोनी शर्मा
मुजफ्फरनगर। सिविल लाइंस स्थित धार्मिक संस्थान विष्णुलोक के ज्योतिषविद् पंडित ललित शर्मा के सुपुत्र पंडित अभिलाष शर्मा ने बताया कि सनातन परंपरा में शक्ति और भक्ति का सबसे बड़ा महापर्व ‘शारदीय नवरात्रि’ 11 अक्टूबर 2026, दिन रविवार से शुरू हो रहा है। चारों ओर गूंजते मां के जयकारेऔर शंखध्वनि के साथ अगले नौ दिनों तक संपूर्ण वातावरण पूरी तरह भक्तिमय रहेगा। इस वर्ष नवरात्रि का त्योहार अत्यंत शुभफलदायी रहेगा, क्योंकि मां दुर्गा का आगमन सुख-समृद्धि के विशेष संकेतों के साथ हो रहा है।
सुख-समृद्धि का संकेत ‘गज’ (हाथी) पर सवार होकर आ रही हैं माता रानी
देवी भागवत पुराण के अनुसार, जब भी नवरात्रि रविवार या सोमवार से शुरू होती है, तो माता रानी का आगमन ‘गज’ यानी हाथी पर होता है। मां दुर्गा का हाथी पर सवार होकर आना बेहद शुभ माना जाता है। यह इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में देश में सुख-समृद्धि बढ़ेगी, कृषि के क्षेत्र में उन्नति होगी, अच्छी वर्षा होगी और चारों ओर खुशहाली आएगी।
घट स्थापना (कलश स्थापना) के शुभ मुहूर्त
पंडित अभिलाष शर्मा ने बताया कि नवरात्रि के पहले दिन प्रतिपदा तिथि को कलश स्थापना का विशेष महत्व है। इस वर्ष घट स्थापना के लिए दो सबसे उत्तम मुहूर्त बन रहे हैं,
• प्रात: काल का मुहूर्त
प्रातः 06 बजकर 19 मिनट से प्रातः 10 बजकर 12 मिनट तक रहेगा।
• अभिजीत मुहूर्त:-
दोपहर 11 बजकर 44 मिनट से दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक रहेगा।
प्रतिपदा तिथि का प्रारंभ 10 अक्टूबर 2026 की रात्रि 09 बजकर 18 मिनट से हो रहा है एवं समापन 11 अक्टूबर 2026 की रात्रि 09 बजकर 31 मिनट पर होगा। उदयातिथि के अनुसार, नवरात्रि का व्रत और घट स्थापना 11 अक्टूबर को ही की जाएगी।
कन्या पूजन महत्व
• शास्त्रों के अनुसार 9 कन्याओं का पूजन सर्वश्रेष्ठ है (9 देवियों का प्रतीक)। जगह या समय की कमी हो, तो कम से कम 2 कन्याओं को भी जिमाया जा सकता है।
• बटुक भैरव अनिवार्य: कन्याओं के साथ कम से कम 1 छोटे बालक (लांगुरिया/भैरव रूप) को भोजन कराना अनिवार्य है, इसके बिना पूजा अधूरी मानी जाती है।
• तिथि महत्व: अष्टमी को पूजन करने से सुख-शांति व कुल की वृद्धि होती है। नवमी को पूजन करने से 9 दिनों के व्रत का पूरा फल (सिद्धि) मिलता है और दरिद्रता दूर होती है।
• 2 वर्ष (कुमारी): दरिद्रता का नाश और दुखों से मुक्ति।
• 3 वर्ष (त्रिमूर्ति): सुख-समृद्धि और धन-धान्य की प्राप्ति।
• 4 वर्ष (कल्याणी): परिवार का कल्याण और शत्रुओं का नाश।
• 5 वर्ष (रोहिणी): रोगों से मुक्ति और अच्छी सेहत।
• 6 वर्ष (कालिका): विद्या, ज्ञान और कार्यों में विजय।
• 7 वर्ष (चंडिका): ऐश्वर्य, मान-सम्मान और वैभव की वृद्धि।
• 8 वर्ष (शांभवी): अटके हुए कामों में सफलता और लोकप्रियता।
• 9 वर्ष (दुर्गा): कठिन साधना की सिद्धि और मनोकामना पूर्ति।
• 10 वर्ष (सुभद्रा): पारिवारिक सुख और लंबी आयु का वरदान।
क्यों मनाई जाती है शारदीय नवरात्रि? (पौराणिक कथाएं)
• महिषासुर का वध (शक्ति की विजय):
क्रूर राक्षस महिषासुर के अत्याचारों से देवताओं और तीनों लोकों को मुक्ति दिलाने के लिए ब्रह्मा, विष्णु और महेश के तेज से मां दुर्गा का प्राकट्य हुआ। मां दुर्गा और महिषासुर के बीच पूरे 9 दिनों तक भीषण युद्ध चला। दसवें दिन मां ने उसका वध कर अधर्म पर धर्म की विजय पताका फहराई।
• प्रभु श्रीराम की शक्ति पूजा:
लंका युद्ध में रावण पर विजय प्राप्त करने के लिए भगवान श्रीराम ने आश्विन मास में समुद्र तट पर नौ दिनों तक मां दुर्गा की कठिन उपासना की थी। मां के आशीर्वाद से दशवें दिन (विजयदशमी) प्रभु राम ने रावण का वध किया। तभी से शारदीय नवरात्रि और दशहरे की परंपरा चली आ रही है।
